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तुम याद आई इतना

जिंदिगी का हर पल , सदियों में बदल गया, तुम याद आई इतना ! एक बूंद की प्यास में, मैं सागर पी गया, तुम याद आई इतना ! -प्रवीण
 
प्रवीण
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बताओ तो

वर्षा में तो यौवन पाया शांत हो गयी जाड़ों में मर गयी जाकर सागर जो जन्मी बीच पहाड़ों में
 
पवन *चंदन*
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मरने की दुवायें क्यूं मांगू, जीने की तमन्ना कौन करे: संगीत चिट्ठाचर्चा

आज सबसे पहले तो सरोद के महान साधक उस्ताद अली अकबर खाँ साहब के निधन पर हार्दिक श्रद्धान्जली। ऐसे महान कलाकार के जाने के बाद सरोद वादन के क्षेत्र में एक शून्यता व्याप सी गई है। कबाड़खाना पर संजय पटेल , खां साहब को श्रद्धान्जली अर्पित करते हुए खां साहब क
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