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वो जिद पे अड़ा है

वो जिद पे अड़ा है वो सबसे बड़ा है मुद्दत से यही तो वो दोहरा रहा है दुनिया का बोझ लिए अपने दिमाग पर अपने ही घर को भूला जा रहा है बात करता है हरदम वो मजहब खुदा कीइंसानियत तो उसको याद ही नहीं है चुन चुन कर निशाना वो साधे हुए है किसी की सुनने कोतैयार ही नहीं