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सुन्दर-प्यारे बस्तर में ये हिंसा भरे नज़ारे कब तक ..?

बस्तर में आज फिर नक्सलियों ने खूनी इतिहास लिखा. ३० से ज्यादा लोग एक धमाके में ही कल-कवलित हो गए. समझ में नहीं आता कि क्रांति की किस किताब में यह लिखा गया है, कि लोगों की जानें लो, तभी इन्कलाब आयेगा. यह बड़ा भ्रम है. जैसे कुछ लोग देवी को प्रसन्न करने के
 
girish pankaj
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माँ दिवस नहीं, ''माँ-शताब्दी'' मनाना होगा

आज हमारी चार माताएं सबसे ज्यादा उपेक्षित हैं. जन्म देनेवाली माता के साथ ही भारत माता, गंगा माता और गौ माता. सबकी दशा ख़राब है. इन सबके लिए अब एक दिन नहीं,पूरी ''माँ-शताब्दी'' मनाने की ज़रुरत है.लेकिन ऐसा होगा नहीं, क्योकि बहुत से तथाकथित आधुनिक कहेंगे इन
 
girish pankaj
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जब्बार ढाकवाला को याद करते हुए एक ग़ज़ल ..

मेरे बेहद आत्मीय मित्र-लेखक जब्बार ढाकवाला और उनकी पत्नी ''तरन्नुम'' का चंबा के पास एक हादसे में कल ७ मई को निधन हो गया. उस भयानक हादसे की कल्पना कीजिये, कि उनकी कार पांच सौ मीटर गहरी खाई में जा गिरी. पल भर में जीवन का खेल ख़त्म....ढाकवाला जी के पर्स से
 
girish pankaj
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दो ग़ज़लें / काले धंधे में डूबा है.... जितना सुख हिस्से में आया..

मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है,यह देख कर कि, कुछ लोग मुझसे जुड़ते जा रहे है. ये ''गिव एंड टेक'' वाले नहीं हैं. ये सब दिल से जुड़ रहे हैं. ये भले लोग है. इनमे विवेक है. भले-बुरे की समझ है. यही चाहता रहा हूँ कि मुझे कम लोग ही मिलें मगर वे सज्जन हों, उनका मन
 
girish pankaj
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मई दिवस पर विशेष ग़ज़ल/ मेहनत और पसीना...

एक मई.... मजदूर दिवस. श्रम की आराधना का दिन. पूजा का दिन. मै दो बार रायपुर श्रमजीवी पत्रकार संघ का अध्यक्ष रहा .अविभाजित मध्यप्रदेश में प्रांतीय महासचिव भी रहा. मैंने श्रमजीवी पत्रकारों के लिए लगातार संघर्ष किया. खतरे उठा कर अनेक आन्दोलन किये. उस वक्त के
 
girish pankaj
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दो ग़ज़लें / इतना अधिक ज़हर मत घोलो,, पाँच सितारा होटल में...

अपना देश जब आजाद हुआ तो एक उम्मीद जगी थी, कि अब नया भारत बनेगा. हम स्वतन्त्र हो कर अपना विकास कर सकेंगे. हमारा 'शासन' होगा. 'लोक' का ही 'तंत्र' होगा. हमारे जनप्रतिनिधि ईमानदारी से काम करेंगे और देश कहाँ से कहाँ पहुँच जाएगा.लेकिन आज हालत क्या हैं? जो
 
girish pankaj
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ग़ज़ल / आज खिला है फूल डाल पर....

बस्तर में नक्सलियों ने विचारधारा के नाम पर जो खूनी खेल खेला, उस पर और कुछ लिखने से कोई फायदा नहीं, फिर भी अन्याय के खिलाफ बार-बार कुछ कहना, लिखना, सड़कों पर उतरना..यह सब ज़रूरी है. यह देख कर लगता है, कि हम मुर्दे नहीं हुये है. रायपुर में आज कुछ लोगों ने
 
गिरीश पंकज
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जो गिर कर के संभालता है ...

साहित्यिक यात्राओं का अपना सुख है. कुछ नए साथियों से मुलाकातें हो जाती है. मित्र-सम्पदा बढ़ती है. ज्ञान बढ़ता है. दौलत काम नहीं आती लेकिन मित्ररूपी दौलत आपको सदा समृद्ध रखती है. इसलिए जैसे ही कही से बुलावा आता है तो मन नहीं मानता, निकल पड़ता हूँ प्रवास
 
गिरीश पंकज
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विश्व गौरैया-दिवस...आँगन में जब आती चिड़िया

आज विश्व गौरैया-दिवस है. बधाइयाँ, शुभकामनाएं, कि हर प्यारी गौरैया बची रहे. मन नहीं माना, सोचा, एक कविता पोस्ट कर दू. हम लोग तमाम जीवो के पीछे पड़े है. गाय, बकरी, (कुत्ते तक.)मुर्गा, तीतर, बटेर, गौरैया, मछली, और न जाने क्या-क्या खाने पर तुले है. आदमी की
 
गिरीश पंकज
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ग़ज़ल/ स्वारथ सधे तो रिश्ता...स्वारथ के सम्बन्ध हो गए

बहुत दिनों के बाद अचानक मन दुखी हुआ तो कुछ शेर बन गए, सो पेश-ए-खिदमत है. आसपास का परिवेश, लोगों की मानसिकता दुख देती है. आप किसी को कुछ बोल नहीं सकते, समझा नहीं सकते. दिमाग में भौतिकता इस कदर हावी है कि मत पूछिए. एक लेखक अपने मन की पीड़ा को शब्दों में ढाल
 
गिरीश पंकज
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सत्ता और व्यवस्था में बैठे लोग........

जिस तेजी के साथ देश में मंहगाई बढ़ रही है, उसे देख कर अब दहशत होने लगी है. आने वाले कल की  तस्वीर आखिर होगी कैसी? क्या यह भारत देश आतंरिक समस्याओं से ग्रस्त होने कि दिशा में बढ़ रहा है? महंगाई के कारण मध्य और  निम्न आय वर्ग के लोग जब उदरपूर्ति
 
गिरीश पंकज
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खलनायक जब हंसता है और भयावह लगता है

रुचिका-मामले में फंसे डीजीपी राठौर की हंसती हुई अश्लील तस्वीरे जब अखबारों में छपी तो लोगों को बड़ा आश्चर्य हुआ, कि ये कैसा आदमी(?)हुई, जो शर्मशार नहीं है, उलटे हंस रहा है?  लेकिन मुझे आश्चर्य नहीं हुआ. क्योकि मै व्यवस्था के क्रूर चेहरों को लम्बे अरसे
 
गिरीश पंकज