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लीक पर वे चलें.....-----------------लीक पर वे चलें जिनकेचरण दुर्बल और हारे हैंहमें तो जो हमारी यात्रा से बने,ऐसे अनिर्मित पन्थ प्यारे हैंसाक्षी हों राह रोके खड़ेपीले बाँस के झुरमुटकि उनमें गा रही है जो हवाउसी से लिपटे हुए सपने हमारे हैंशेष जो भी हैं-वक्ष
 
वन्दना अवस्थी दुबे