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बिहार - समय के साथ बदल रहा है स्वाद

बीतते हुए समय के साथ बिहार में बहुत कुछ बदलता जा रहा है। वंशवृद्धि के कारण हुए बंटवारे से खेत भले ही सिकुड़ती जा रही हो, उपज काफी बढ़ गई है। पिताजी ने बताया कि पहले जब लोगों के पास काफी खेत थे तो बहुत बड़ी आबादी मड़ुवा, जनेरा, सामा-कोदो खाने को विवश थी। जो
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बिहार - समृद्धि आई तो भागे अपराध

सूरज की किरणें जब अपना उजास फैलाती हैं, तो घटाटोप अंधकार का साम्राज्य भी खत्म हो जाता है। सरकारी कायदा जब सुधरता है तो बहुत सारी व्यवस्थाएं खुद-ब-खुद पटरी पर आ जाती हैं। पिछले डेढ़-दो दशक में जिस तरह अपहरण काण्ड कुटीर उद्योग की श्रेणी में आ गए थे और इनसे
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बिहार - गांवों की चमाचम सड़कें करती हैं स्वागत

करीब 18 माह के लंबे अरसे के बाद पिछले दिनों बिहार जाने का सुअवसर मिला। वैसे गत वर्ष मई में भी गया था, लेकिन समयाभाव में पटना से ही लौट आने के कारण यह लकीर छूकर आने भर की यात्रा रह गई थी। इस बार दर्जनों गांवों की यात्रा के क्रम में डेढ़-दो सौ किलोमीटर का
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अकाल की ओर बढ़ती दुनिया!

वैज्ञानिकों ने एशियाई देशों को चेतावनी दी है कि आने वाले वक्त में खाद्यान्न के भारी संकट का सामना करना पड़ेगा । 2050 तक एशियाई देशों में खाद्यान्न की माँग दोगुनी हो जाएगी। आकलन ये भी है कि एशिया की जनसंख्या अगले 40 वर्षों में डेढ़ अरब बढ़ जाएगी। ये आकलन
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भोजन भट्ट की रसोई

नया साल मुबारक हो सबकी थाली में खाना हो हर रसोई में चूल्हा जलता रहे किसी की जेब खाली न हो खुशी और पकवान सबके नसीब में हो इसी चाहत के साथ भोजन भट्ट var gaJsHost = (("https:" == document.location.protocol) ? "https://ssl." : "http://www."); document.wr
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उसकी इज्ज़त घर और पति/पिता/भाई कि इज्ज़त से होती हैं । गलत , An open letter for Abha Rathor Ruchika Molestation Case India

भारतीये परिवेश मे नारी को हमेशा यही समझाया जाता हैं कि उसकी इज्ज़त घर और पति/पिता/भाई कि इज्ज़त से होती हैं । इस लिये भारतीये नारी अपने आस पास के पुरुषो को उनके गलत काम के लिये निरंतर बचाती हैं और ये भूल जाती हैं कि एक दूसरी महिला के प्रति वो अत्याचा
 
रचना
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आभा राठौर के नाम खुला पत्र……..

पिछले एक हफ्ते से रुचिका molestation केस पर आया निर्णय पूरे देश में चर्चा का विषय है। देश के हर कोने से इस निर्णय के विरोध में आवाजें उठ रही है। हर शख़्स को कोर्ट से बाहर निकलते वक्त राठौर के चेहरे पर खिली मुस्कराहट विचलित कर रही है। हर शख़्स इस मुस्
 
pratibha
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"नारी" क्या सिर्फ एक मुद्दा है?

नारी कि शिक्षा , अधिकार और आरक्षण एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना रहा है। सिर्फ समाज के लिए ही नहीं बल्कि राजनीति, परिवार और बुद्धिजीवियों के मध्य भी। सबसे पहले तो 'नारी ब्लॉग' ही बुद्धिजीवियों के लिए एक विषय बना हुआ है। चर्चा के लिए और फिर लिखे हुए के लिए
 
रेखा श्रीवास्तव
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कन्या भ्रूण हत्या - कन्या परित्याग आखिर कब तक?

पहले भी मैं एक आलेख इस विषय पर लिख चुकी हूँ, किन्तु लगता है इतना सामान्य सा होता हुआ विषय हमें फिर भी जीभ चिढ़ा रहा है। आखिर क्यों? कल खबर मिली कि ५ माह का कन्या भ्रूण सड़क के किनारे पड़ा मिला और आज ५ वर्ष कि लड़की कि लाश स्टेशन पर मिली। शाल में लिपटी
 
रेखा श्रीवास्तव
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बेटी ही क्यों.....

आज पेपर में एक खबर छपी है कि पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर सीमान्त प्रांत के बुनेर जिले के रहने वाले अरशद मलंग के शरीर पर कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के चलते बाल नहीं थे, इससे उसे अपने पौरुष में कमी महसूस होती थी। उसने अल्लाह से दुआ मांगी कि अगर उसके शरीर पर ब
 
pratibha
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हमारी नारी सशक्तिकर्ण पर आयी पोस्ट अखबार मे

नारी की पोस्ट 2 दिसम्बर 2009 को डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट के नियमित स्तंभ 'ब्लॉग राग' चित्र आभार "प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा ब्लॉग" रचना बधाई तुम लेखिका बन ही गयी
 
सुमन जिंदल
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इतिश्री नारीमुक्ति - सशक्तिकरण प्रकरणं !

समाज का निर्माण नर - नारी दोनों से ही मिलकर हुआ है। परिवार रूपी गाड़ी के दो पहिये स्वीकार किए जाते हैं - दो पहिये जब एक ही आकर, आचार-विचार , व्यवहार और अधिकार के हों तो वह गाड़ी बहुत दूर तक जाकर अपनी मंजिल पा लेती है और यह एक सफल जीवन का मूलमंत्र है। अ
 
रेखा श्रीवास्तव
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ऐसा क्यो?

हमेशा से कहा जाता है स्त्री पुरुष (पति-पत्नी )एक ही रथ के दो पहिये है |हवन में साथ बैठते है तब पूजा करते वक्त पति के हाथ के उपर पत्नी का हाथ रखा जाता है या पति कि कोहनी को पत्नी हाथ लगा देती है | पत्नी के हाथ में या पत्नी कि कोहनी को हाथ लगाकर पूजा क
 
शोभना चौरे
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क्या करे ?

शुभा जब १० साल की उसके पिता एक बिजली के खम्बे से गिरकर अपाहिज हो गये उनको हर्जाना(बिजली विभाग ) इसलिए नही मिला क्योकि वो उनकी ड्यूटी नही थी वो किसी और की जगह काम करने चले गये थे|और नौकरी भी हाथ से चली गई |जैसे तैसे अपने परिवार का गुजारा चलाया शुभा के
 
शोभना चौरे
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नारि न मोहे नारि के रूपा!

तुलसीदासजी ने सत्य ही कहा था - "नारि न मोहे नारि के रूपा" और ये सच भी था, जब सौंदर्य , अधिकार और शक्ति की बात होने लगती है तो यह "न मोहे" बीच में आने लगता है। कहाँ से शुरू किया जाए? पुत्री के जन्म से लें - कन्या भ्रूण हत्या या फिर कन्या शिशु हत्या के
 
रेखा श्रीवास्तव
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एनआरआई दूल्हे

आजादी के इतने सालों के बाद विदेशी चीजों के प्रति हमारा मोह घटने के बजाय बढ़ा है। हमें हर वो चीज प्रिय है जिसका संबंध विदेश से हो। यहां तक हमारी नज़रों में उन लोगों का दर्जा बढ़ जाता है जो भारतीय होते हुए भी विदेश में बस जाते हैं। वे विदेश में क्या कर
 
pratibha
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१९६०-२००९

१९६० एक परिवार , बेटा आ ई अस { I A S } मे प्रेम विवाह बहू आ ई अस { I A S } पहली संतान पुत्री लाडली दादी की माँ काम पर जाती , शाम को आती , सिर पर आँचल ले कर रहती , घर मे ससुर भी थे इस लिये , और सिर पर आँचल से ही आदर का पता चलता हैं । घर मे नौकर चाकर थ
 
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सिर का आंचल पैरों की पायल - क्यों छोड़ी गई?

सिर का आँचल और पैरोंकी पायल क्यों छोड़ी गई, कभी इसके बारे में भी विचार किया गया है? ये उसकी मजबूरी थी और फिर जब तक वह सिर पर आँचल रखे रही क्या मिला? बस घर वालों की चाकरी और चार बातें. बरसों पहले वह सिर पर आँचल रख कर ही पढने जाती रही. मेरी एक सहपाठी, ज
 
रेखा श्रीवास्तव
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अब अपर्णा क्या करे

अपर्णा ने सुमित के साथ घर से भाग कर शादी की थी। उस समय उसकी उम्र महज अठारह साल थी। घर वालों को जब इसका पता चला तो उन्होंने इस शादी का विरोध किया पर अपर्णा अपने निर्णय पर दृढ़ थी। शादी के समय सुमित कुछ नहीं करता था, वह पूरी तरह अपने मां-बाप पर निर्भर
 
pratibha
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लिखने और पढने

कंप्यूटर पर हिन्दी टाइपिंग का संक्षिप्त विवरण देवनागरी फोन्टें Google Indic Transliteration ( an add on for Fire fox) ScrapBook (To save web pages on your computer to read at offline) Helps you to save Web pages and organize the collection.
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रचनाधर्मिता क्या है और क्या कहती है?

नारी ब्लोग्स सिर्फ महिलाओं के लिए है और उनके ही ब्लोग्स इसपर पब्लिश होते हैं । इसमें किसी को क्या आपति है? आज सुबह जो भी इस ब्लॉग के लिए लिखा मिला। जो भी हों - पहले लेखन के प्रति रचनाधर्मिता का पालन कीजिये। सिर्फ ये ही ब्लॉग क्यों? कमेन्ट तो सबके प्र
 
रेखा श्रीवास्तव
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औरतें और सीमित विकल्प

मेरे लेख पर अच्छी प्रतिक्रियाएं मिलीं. सबने मेरे सवाल का जवाब अपने-अपने दृष्टिकोण से दिया. पर अफ़सोस, अधिकतर लोगों ने मेरे सवाल के संदर्भ पर ध्यान नहीं दिया, सुमन को छोड़कर. मेरा सवाल उस संदर्भ में था, जब हमारे एयर वाइस चीफ़ मार्शल ने यह कहा था कि वे
 
mukti
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क्या बच्चे पैदा करना औरतों की कमज़ोरी है?

कल एक समाचार सुनकर मन प्रसन्न हुआ था. खबर थी कि एक कुश्ती मुकाबले में एक महिला पहलवान ने पुरुष पहलवान को पटखनी दे दी. सोचा कि "नारी" ब्लॉग पर एक आलेख लिखुँगी कि यह एक मिथक है कि महिलाएँ शारीरिक रूप से कमज़ोर होती हैं. यदि उनका पालन-पोषण भी लड़कों की
 
mukti
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ये कैसी शादी ?

ऋचा और शेखर की शादी धूमधाम से हुई | दो साल से दोनों एक ही कम्पनी में साथ काम कर रहे थे , दोनों की जाति में भी काफी समानता थी तो घरवालो को कोई आपति नही थी शादी में | , दादा दादी , नाना नानी , ताऊ ताई , चाचा चाची , मामा मामी , मोसा मोसी , ढेर सारे अंकल
 
शोभना चौरे
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हाथ बढाएं

पिछले कुछ दिनों से ' नारी ' का अवलोकन कर रही हूँ पर आज पहली बार कुछ लिख रही हूँ । सबसे पहले तो मैं सुमन जी तथा आप सभी का भारतीय महिला को यह विचार मंच देने के सराहनीय प्रयास के लिए अभिनन्दन करती हूँ । आज भारतीय नारी की बहुत उपलब्धियां हैं पर आज भी कई
 
Deepa
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परिवार के बदलते प्रतिमान!

मुक्ति जी की श्रंखला को पूरा कराने का इरादा नहीं है किंतु इसकी संरचना और रचनाधर्मिता और विघटन को गहराई से देखना है. संयुक्त परिवार की संकल्पना तब से चली आ रही है , जबकि पूरा परिवार कृषि , व्यवसाय पर निर्भर रहता था और वह भी पैतृक होता था। सारी पीढियां
 
रेखा श्रीवास्तव
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तकनीकी विकास और औरतें

मुझे हमेशा से ही इस बात की शिकायत रही है कि शादी के बाद पतियों के दोस्त तो बने रहते हैं, लेकिन पत्नियाँ अपनी सहेलियों से दूर हो जाती हैं. वे बेचारी पति, सास-ससुर और बच्चों की सेवा करते-करते भूल जाती हैं कि कभी वे भी सखियों-सहेलियों के साथ हँसती-खिलखि
 
mukti
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यह मिथक तोड़ना ही होगा कि नारी अबला है!

नारी मंच के माध्यम से मैं यह बताना चाहूंगी कि हमारे भारतीय सामाजिक व्यवस्था आज भी बहुत कुछ पुरुष प्रधान ही है. माँ, पत्नी व पुत्री को समर्पित होने की असमानता आधारित सोच आज भी विद्यमान है. आज भी इसी मानसिकता के चलते नारी को कमजोर आंका जाता है. यही कार
 
KAVITA RAWAT
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मैं बेचारी रह गयी

आजकल नारी ब्लॉग में विवाह-संस्था पर चर्चा चल रही है. मुझे जब इस ब्लॉग पर लिखने के लिये आमन्त्रित किया गया तो मैंने सोचा कि मैं भी अपने कुछ अनुभव बाँटूं. विवाह भारत में एक पवित्र संस्था मानी जाती है. इस पर सभी सहमत होंगे कि समाज में व्यवस्था बनाये रखन
 
mukti
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दरकती 'विवाह संस्था' के महत्वपूर्ण कारक!

विवाह संस्था' अब नई पीढ़ी के मायनों में दरकने लगी है। इसके लिए वही सिर्फ दोषी हैं ऐसा मैं नहीं मानती। आज सबसे बड़ा पैकेज दिखाई देता है। इस पैकेज के लिए सबसे बड़ा चाहने वाला वर्ग 'मध्यम वर्ग'. मध्यम वर्ग के लोगों को भी सपने देखने का हक़ है और वे किसी भ
 
रेखा श्रीवास्तव
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वो पढ़ा तो इसे भी पढ़ लीजिए... पढने के बाद ....

वो पढ़ा तो इसे भी पढ़ लीजिए...खुशदीप ........ पढने के बाद .... इस विमर्श से जुड़े कुछ मुद्दे मेरी नजर में इस प्रकार हैं ... 1 . स्त्री और पुरुष एक दुसरे के पूरक हैं ...मैं इस विचार से पूरी तरह सहमत हूँ ...और इस तरह की किसी भी शिक्षा की समर्थक नहीं रह
 
वाणी गीत
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क्या इसी तरह होगा प्रताडित महिलाओं का उद्धार ..!!

उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले के सकारन गांव में रहने वाले 22 वर्षीय महावीर ने 60 साल की विधवा जानकी देवी की मांग में सिंदूर भरा है...बाकायदा अपनी पत्नी मान लिया है...दादी की उम्र वाली पत्नी...महावीर ने ये दौलत-जायदाद के लालच में नहीं किया है...न ही ज
 
वाणी गीत
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महिलाओं की उपस्थिति और बंदिशे अनुशासन की

इलाहाबाद की गोष्‍ठी के बाद महिलाओं की उपस्थिति के बारे में चर्चा हुई। वैसे यह आयोजकों का विषय है कि किसे बुलाए और किसे नहीं। लेकिन महिलाओं के प्रति एक विचित्र दृष्टिकोण रहता है, जो मुझे अनुभव से प्राप्‍त हुआ है। मैं विगत तीन वर्षों तक राजस्‍थान साहित
 
Dr. Smt. ajit gupta
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आप पुरूष हैं और कुछ भी कह लेगे इस अहम् से उठ कर एक बार अपनी माँ को दोनों लेख पढ़वाए

मैने अपना प्रोफाइल शायद जुलाई के आखरी हफ्ते से ही बंद कर दिया था और मेरे ब्लॉगर मित्र इस बात को जानते हैं । उस दिन जब पोस्ट डाली तो चंद मिनट के लिये प्रोफाइल को खोला था और फिर बंद कर दिया । प्रोफाइल बंद नहीं किया हैं , बस उसको गूगल की दी हुई सुविधा क
 
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सलीम खान मै मुस्लिम धर्म अपनाना चाहती हूँ बशर्ते

सलीम खान मै मुस्लिम धर्म अपनाना चाहती हूँ बशर्ते की आप किताबी बान्ते छोड़ कर व्यवहारिक बातो मै मुझे ये कन्फर्म कर दे । मै ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हूँ सो कुरान और रामायण के बीच की दूरी पर बात नहीं कर सकती लेकिन मुस्लिम धर्म कबूल करना हैं तो आप से बेहतर कौ
 
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"एकल नारी शक्ति संस्थान "

भारत मे "सिंगल वूमन" की संख्या आज ३६ मिलियन हैं । ये वो नारियां हैं कानून तलक शुद्दा या विधवा हैं या छोड़ी हुई हैं । इन सभी को अपनी जिंदगी मे वो अधिकार नहीं हैं जो मूलभूत अधिकार माने जाते है । इनका राशन कार्ड , बी पी अल कार्ड या जॉब कार्ड नहीं बनता है
 
suman