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एक प्याली चाय

चाय की चुस्की न हो तो सचमुच चुस्ती ही नहीं आती. हाल ही में जब अमेरिकी सेना के सैनिक ईराक के बसरा शहर में हो रही एक विशेष बैठक को सुरक्षा प्रदान करने गए तो सारी थकावट उतार कर एक बार फिर से चुस्त होना उनके लिए भी ज़रूरी था. यह मीटिंग हो रही थी 6 जून 2010
 
Rector Kathuria
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सैनिक और बच्चे

सेना के बूटों की धमक और तोपों के गोलों की आवाज़ शायद अफगानिस्तान की तकदीर बन चुकी है.पर कुछ हिम्मतवर लोग आंधियों के सामने भी चिराग जलाने की परम्परा को मजबूत करने से कभी नहीं चूकते...चाहे जंग का मैदान ही क्यूं न हो. अमेरिकी सेना के Spc. Joshua Rojas
 
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आइये आप भी सुनिये सफ़दर की बुलंद आवाज़

सफ़दर हाश्मी को मिटाने वालों ने तो शायद यही सोच होगा कि बस एक खून और सफ़दर भी खत्म और उसकी आवाज़ भी. पर हुआ एन उल्ट. सफ़दर का लहू जब बहा तो उसने याद दिला दी कि हां रक्त बीज सिर्फ एक कहानी नहीं' यह सचमुच हो सकता है. आज भी उसकी आवाज़ गूँज रही है.
 
Rector Kathuria