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भाजपा के अस्तित्व पर दस बड़े सवाल ! (कनिष्क की बक-बक )

हर दिन व्यवहार में हिंदुत्व का आधा चेहरा पश्चिमी लिबास , पश्चिमी भाव , पश्चिमी शैली , भूमंडलीय भाव पूरित, भूमण्डलीय मलाई चहकता नज़र आता है. जब विदेशी निवेश , डोलारिकरण पर , निर्यतिकरण पर , विदेशी मुद्रा भंदारिकरण पर सब कुछ निर्भर करता है तो उतेजित किया
 
kanishka kashyap
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हिन्दु संसकृति को समझने और सुरक्षा की जरूरत

कितने राजनेता, सामाजिक कार्यकर्त्ता, प्रशासक या पत्रकार जीव वैज्ञानिकों की इस जानकारी से संज्ञान रखते है कि निकट संबधों में वैवाहीक संबध रूग्ण और विकृत संतति को जन्म देने की बलवती संभावना रखती है। वर्तमान में भी निकटम रक्त संबधों के विवाह रूग्ण-मंद
 
Dr Atul Kumar
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सम्पादकीय: खोई हुई पगडण्डियाँ

जैसे मनुष्य अधूरा है वैसे मनुष्य की कला अधूरी है। इस अधूरेपन का अहसास ही जीवन को सौन्दर्यमय और गतिशील बनाने में तत्पर रहता है। इस अधूरेपन को कभी मृत्यु अर्थ देती है, कभी जीवन की दूसरी आवश्यकताएँ। इन दोनों से बचकर मनुष्यता ने यदि कुछ हासिल किया है तो वह
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इस अगम परिसर में - सम्पादकीय: विजय शंकर

पिछले दिनों महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादेमी ने सर्व भारतीय भाषा सम्मेलन, नागपुर में आयोजित किया था। यह दूसरा आयोजन था। पहला उन्होंने मुम्बई में किया था। मैंने भी उसमें शिरकत  की थी। मुझे बहुत खुशी हुई। साहित्य अकादेमी, दिल्ली को छोड़कर शायद
 
विजेंद्र एस विज
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शिक्षा में साजिश

जिन 44 संस्थानों की मान्यता रद्द की गयी है, उसमें गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय भी है। 1902 में स्वामी श्रद्धानंद ने इसकी स्थापना ब्रिटिश शिक्षा पद्धति से मुकाबला करने के लिए की थी। अंग्रेजों के लिए यह संस्थान हमेशा आंख की किरकिरी बना रहा, लेकिन वे इसके
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जिलों को राज्य जैसा बनाया जाए

-विमल कुमार सिंह तेलंगाना के मुद्दे पर पैदा हुए मौजूदा विवाद ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारी सरकार अपने विवेक से कम और दबाव में अधिक काम करती है। तेलंगाना आंदोलन के तेज होते ही सरकार ने नए राज्य के गठन की घोषणा कर दी, लेकिन विरोधियों ने जब अपनी उग्र
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वाचिंग डौग की ईमानदार भूमिका किस लिए?

दृष्टिपात का जून की तरह जुलाई अंक भी हम पत्रकारिता को समर्पित कर रहें हैं, और आगे भी दो अंक पत्रकारिता विशेषांक ही प्रकाशित करेंगे। यह अंक लघु पत्रकार, वेब पत्रकार एवं पत्रकारिता पर केंद्रित है. आज पूरे देश में लघु समाचार पत्रों एवं पत्राकारों की स्थ
 
Arun Kumar Jha
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इस अगम परिसर में

पिछले दिनों महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादेमी ने सर्व भारतीय भाषा सम्मेलन, नागपुर में आयोजित किया था। यह दूसरा आयोजन था। पहला उन्होंने मुम्बई में किया था। मैंने भी उसमें शिरकत की थी। मुझे बहुतखुशी हुई। साहित्य अकादेमी, दिल्ली को छोड़कर शायद ही किसी
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Editorial 1

कवि-बिम्बों से ही समृद्ध होती है:- ‘एकला चलो’ वाले रबीन्द्रनाथ, ‘चीर डालो ओ प्रभु लालसा में भरा ये हृदय’ की अक्का महादेवी, ‘नाचत है कुलनासी’ वाली मीरा, ‘डुबोया मुझको होने ने’ वाले ग़ालिब, ‘अभी टुक रोते-रोते सो गया है’ वाले मीर-जिनकी क़ब्र आजहर महान कवि
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Editorial 2

पिछले दिनों महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादेमी ने सर्व भारतीय भाषा सम्मेलन, नागपुर में आयोजित किया था। यह दूसरा आयोजन था। पहला उन्होंने मुम्बई में किया था। मैंने भी उसमें शिरकत की थी। मुझे बहुतखुशी हुई। साहित्य अकादेमी, दिल्ली को छोड़कर शायद ही किसी
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जनसत्ता के लिए

जन सरोकारों से जुड़ी हुयी पत्रकारिता की जब बात आती है तो 'जनसत्ता' नामक अखबार का उल्लेख अनिवार्य हो जाता है। स्वर्गीय प्रभाष जोशी के नेतृत्व में शुरू हुए इस अखबार ने पत्रकारिता, विशेष रूप से हिंदी पत्रकारिता की दिशा ही बदल दी। उन्होंने अपने अखबार का न
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मंचों का ठाट

हिन्दस्‍वराज के शताब्‍दी वर्ष पर  सजग ,  जागरूक भारतीय के मन में एक विचार कौंधता  है ,  गांधीजी आज यदि जिंदा होते ,  तो उनकी स्थिति क्या  होती ?  गांधीजी यदि आज होते ,  तो भारतीय राजनीति  और करोड़ों जनता क
 
Arun Kumar Jha