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समय विदा लेने को आतुर है एक नई सुबह के निनाद के लिए ....

समय विदा लेने को आतुर है एक नई सुबह के निनाद के लिए .... फिर होगा एक मंच, मिलेंगे हम , होगा एक उत्सव हमारी कृतियों का ,जुड़ेंगे नए कदम हमारे साथ और कहेंगे ... मकसदों की आग तेज हो मनोबल की हवाएं हो तो वह आग बुझती नहीं है मंजिल पाकर ही दम लेती है आंधियां
 
रवीन्द्र प्रभात