पसंद करें
9
नापसंद करें

बेटा बोला कि माँ मैं आपको मिस कर रहा हूँ

ज्‍योतिष को मैं मानती हूँ लेकिन उसे अपने ऊपर हावी नहीं होने देती। मुझे लगता है कि बस कर्म करो, आपको फल मिलेगा ही। लेकिन पता नहीं क्‍यों इन दो-चार दिनों से मुझे लग रहा है कि दिन अच्‍छे आ गए हैं। इसलिए अच्‍छे दिनों को भी आप सभी से बाँट लेना ही चाहिए।
 
ajit gupta
पसंद करें
4
नापसंद करें

हम इतने छुई-मुई से क्‍यों हैं? किसी ने कुछ कहा और हम भाग खड़े होते हैं?

जब लोगों को देखती हूँ कि गुलाब की पत्तियों से भी घाव कर लेते है तो मुझे लगे काटों के घाव सोचने पर मजबूर कर देते हैं। मेरे घाव कहते हैं कि अरे तू तो रोती नहीं? कांटे भी चुभा दिए, तलवारें भी चला लीं, तोप-तमंचे सभी का तो उपयोग कर लिया फिर भी तू स्थिर है?
 
ajit gupta
पसंद करें
5
नापसंद करें

असली चेहरा तो हमने सात तालों में बन्‍द कर रखा है

हमारे घर के प्रोडक्‍ट बनाते-बनाते आखिरकार भगवान थक गया तो अन्तिम बार थोड़ा टांच-वांच कर हमें छोटा-मोटा रूप दे दाकर धरती पर भेज दिया। अब माँ भी परेशान हो चली थी, बच्‍चों की परवरिश करते-करते, तो उसने भी भगवान द्वारा छोड़ी गयी छोटी-मोटी दरजों को दूर करने में
 
ajit gupta
पसंद करें
6
नापसंद करें

हमें तलाश है ऐसे कपड़ो की जो . . .

अमेरिका की यात्रा करना भी एक जद्दोजेहद से कम नहीं है। पता नहीं कितनी तैयारी करनी पड़ती है? ऐसा नहीं है कि अटेची उठाओ, चार साड़ी डालों और चल पड़ो। वहाँ जाने का मतलब है भारतीय वेशभूषा से अलग वस्‍त्र। हमारे राजस्‍थान में तो इतने रंगीन कपड़े पहने जाते हैं कि
 
ajit gupta
पसंद करें
0
नापसंद करें

हँसी ने मित्र बनाया और हँसी ही गायब हो गयी

उसकी खनखनाती हँसी ऐसे लग रही थी जैसे झरना कलकल बह रहा हो, या सुदूर पहाड़ों के मध्‍य कहीं से मन्दिर की घण्टियां बज उठी हों। मैं उसकी तरफ खिचने लगी। मन कर रहा था कि यह ऐसी ही हँसती रहे और मैं उस निर्मल हँसी का पान करती रहूँ। मैंने अपनी दोस्‍ती का हाथ
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
0
नापसंद करें

जब कोई प्‍यार में हो तब वह सही होता है

एक फिल्‍म आयी थी ‘जब वी मेट’ उसके नायिका एक संदेश देती है कि जब कोई प्‍यार में हो तो वह बिल्‍कुल सही होता है। फिल्‍म देखने के बाद यह संदेश गले नहीं उतरा, बहुत चिंतन-मनन हुआ। फिर एक दिन अचानक ही दिमाग की बत्ती जली, ज्ञान का प्रकाश फैल गया। मुझे सुनायी
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
0
नापसंद करें

अरे आप घर पर ही हैं क्‍या?

हैलो, फोन उठाते ही सामने से आवाज आयी, अरे आप घर पर ही हैं क्‍या? आश्‍चर्य से भरा स्‍वर सुनाई देता है। हाँ, घर पर नहीं होऊँगी तो कहाँ जाऊँगी? मैंने प्रश्‍न कर लिया। अरे आप रोज ही तो बाहर जाती हैं, कभी दिल्‍ली तो कभी मुम्‍बई। बेचारे डॉक्‍टर साहब को अकेला
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
3
नापसंद करें

साहित्‍यकार माता-पिता का स्‍मरण कौन करता है?

खुशबू हूँ मैं फूल नहीं जो मुरझा जाऊँगा जब भी मुझको याद करोगे मैं आ जाऊँगा। ये पंक्तियां रात को टीवी पर सुनी थी, मन से निकल नहीं रही। ऐसे लग रहा है जैसे दिल में समा गयी हों। टीवी पर संगीत का कार्यक्रम चल रहा था, उसमें प्रसिद्ध गायक शान अपने पिता का स्‍मरण
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
3
नापसंद करें

प्रतिक्रिया करें, सुप्‍त ना रहें

रेल के एसी द्वितीय श्रेणी में अधिकतर सम्‍भ्रान्‍त लोग यात्रा करते हैं, मैंने अधिकतर सम्‍भ्रान्‍त लोग इसलिए लिखा है कि कभी-कभार मुझ जैसे लोग भी यात्रा करते हैं। वहाँ के बेड-रोल अक्‍सर गन्‍दे होते हैं। मैं उदयपुर में निवास करती हूँ तो मेरा उदयपुर से चलने
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
4
नापसंद करें

अमेरिकी-गरीब के कपड़े बने हमारे अभिनेताओं का फैशन

अमेरिका के एक मॉल में घूम रहे थे। कुछ किशोर बच्‍चे अजीबो-गरीब ड्रेस पहने हुए थे। किसी ने अपनी आयु से काफी बड़ा टी-शर्ट, किसी ने फुल टी-शर्ट पर हॉफ शर्ट और फटी जीन्‍स पहन रखी थी। वे बच्‍चे मेक्सिन, साउथ अफ्रिका आदि देशों के थे। गरीब थे और छोटे-मोटे धंधे
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
2
नापसंद करें

परिवारवाद बनाम केरियरवाद

आज समाचार पत्रों में एक समाचार प्रकाशित हुआ, बी.बी.सी. ने एक सर्वे कराया कि सात मानवीय दुर्गुण यथा लोभ, ईर्ष्‍या, आलस्‍य, पेटूपन, वासना, क्रोध और अभिमान किन देशों के नागरिकों में अधिक है? आस्‍ट्रेलिया, अमेरिका, मेक्सिको, दक्षिणी कोरिया आदि देश इन
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
1
नापसंद करें

जमाखोरों के विरोध में आम जनता को जागृत होना होगा

कहते हैं कि सुधार सरकारे नहीं समाज करता है। लेकिन आज हम सब सरकारों के मुँह की ओर ताक रहे हैं। सरकारों को वे लोग संचालित कर रहे हैं जिनके पास शक्‍कर की ‘मिले’ हैं, हजारों बीघा जमीन हैं। क्‍या ऐसी सरकार और ऐसे मंत्री जमाखोरों को सबक सिखा सकते हैं? उदयपुर
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
2
नापसंद करें

सकून आता जाएगा

अभी समीरलाल जी की पोस्‍ट आयी, "दूर हुए मुझसे वो मेरे अपने थे"। मन में कहीं उथल-पुथल सी हुई, रिश्‍तों को लेकर। मेरा यह आलेख समीर जी के लिए - सकून आता जाएगाकई दिनों से मन में एक उद्वेग उथल पुथल मचा रहा है, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि क्या है? तभी डॉक्टर पति के
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
5
नापसंद करें

डर कैसे बस गया जीवन में?

बचपन शहर से दूर रेत के समन्‍दर के बीच व्‍यतीत हुआ। साँप और बिच्‍छू जैसे जीव रोज के ही साथी थे। वे बेखौफ कभी भी घर में अतिथी बन जाते थे। लेकिन डर पास नहीं फटकता था। घर के आसपास रेत के टीले थे, रोज शाम को सहेलियों के साथ वहाँ जाकर टीलों के ऊपर बैठते थे
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
5
नापसंद करें

दिसम्‍बर में आएंगे घर-घर में राम

चौंकिए मत। राम को वनवास मिला और वे जिस दिन अयोध्‍या वापस लौटे, उस दिन दीपावली मनी। कौशल्‍या के दुलारे राम, या किसी माँ के लाड़ले बेटे का आगमन दीपावली ही तो मनाता है। भारत के लाखों माँओं के लाल आज विदेशों में हैं। विदेशों में दिसम्‍बर मास में ही छुट्टि
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
1
नापसंद करें

बच्‍चों और वृद्धों के लिए डे-केयर सेंटर

कभी बचपन लड़खड़ाकर चलता था तब एक वृद्ध हाथ उसकी अंगुली पकड़ लेता था और जब कभी वृद्ध-घुटने चल नहीं पाते थे तब यौवन के सशक्‍त हाथ लाठी का सहारा देकर उन्‍हें थाम लिया करते थे। एक तरफ घर में जिद्दी दादा जी हुआ करते थे, वे जो भी चाहते थे वही घरवालों को करना
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
5
नापसंद करें

सादगी से भरा बंगाली विवाह

अभी 29 नवम्‍बर को एक विवाह में सम्मिलित होने भोपाल गए थे। समधियों के यहाँ लड़की की शादी थी। बारात बंगाली परिवार की थी। बारात शाम को पाँच बजे आने वाली थी तो हम सब दरवाजे पर उनके स्‍वागत के लिए आ खड़े हुए। मुझे किसी काम से दो मिनट के लिए पण्‍डाल में जाना
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
4
नापसंद करें

अंग्रेजी खूनी पंजे-2

भारत में अकाल पड़ने का इतिहास हमेशा मिलता रहा है। लेकिन मृत्यु का इतना बड़ा आंकड़ा अंग्रेजों के काल में ही उपस्थित हुआ। गरीब जनता की मृत्यु इसलिए नहीं हुई कि देश में अन्न की कमी थी। जनता की मृत्यु इसलिए हुई कि अन्न इंग्लैण्ड जा रहा था। भारत में एक तरफ अ
 
Dr. Smt. ajit gupta
पसंद करें
4
नापसंद करें

अंग्रेजी खूनी पंजे

अभी अदा जी की एक पोस्‍ट आयी, हमारी राष्‍ट्रपति के इंग्‍लैण्‍ड दौरे को लेकर। भाई प्रवीण शाह ने अपनी टिप्‍पणी में लिखा कि अंग्रेजों ने हमें बह‍ुत कुछ दिया है। मैं यहाँ अंग्रेजों ने हमें कैसे लूटा है उसका ब्‍यौरा दे रही हूँ। यह आलेख मेरी पुस्‍तक "सांस्‍
 
Dr. Smt. ajit gupta