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पुरूष की मुट्ठी में बंद है नारी-मुक्ति की उक्ति-2

शब्दों को छोड़कर आइए अब ज़रा विज्ञापन की दुनिया का जायज़ा लें । नारी शरीरों की निर्वस्त्रता पर नारी संगठन और संस्कृतिदार पुरूष अपना विरोध कई तरह से प्रकट करते आए हैं व कर रहे हैं । मगर, कई बैंको और फाइनेंस कंपनियों के दर्जनों ऐसे विज्ञापन पत्र-पत्रिकाओं,
 
संजय ग्रोवर Sanjay Grover
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पुरूष की मुट्ठी में बंद है नारी-मुक्ति की उक्ति-1

प्रशंसा सुनकर गद-गद होना या झूठी तारीफ सुनकर दूसरों का काम तुरत-फुरत कर देना-एक ऐसी कमजोरी है, जो ज्यादातर लोगों में पाई जाती है । मगर जिस वर्ग को इस विधि से सर्वाधिक छला गया है, वो है-स्त्री वर्ग । सुंदर और मोटे-मोटे शब्दों का जाल बिछाकर स्त्री को
 
संजय ग्रोवर Sanjay Grover