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अघोरेश्वर भगवान राम जीः भ्रमण
प्रकृति के अवयव गुणों के भीतर रचित हैं । गुण तीन हैं । १, सत्वगुण २, रजोगुण ३, तमोगुण । गुण विभाग से यह सृष्टि है अतः सर्वत्र तीनों गुण विद्यमान हैं । जिस गुण की विद्यमानता जहाँ अधिक परिमाण में होती है वहाँ उसका प्रभाव सहज दृष्टिगोचर
Jun 13 2010 07:56 AM



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