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अन्नाज बर्बाद न करे, संभव हो तो मदद के लिये खुद आगे बढे। एक नजर चित्रों पर

हम कितना भी नेस्डेक और बीएसई की बात कर ले लेकिन सच्चाई यह है कि दुनिया एक बड़ी आबादी आज भी एक समय की रोटी के लिये तरसती है। बहुत से ऐसे देश हैं जहां अन्नाज को समुद्र में फिकवा दिया जाता है। क्योंकि उनके गोदामों में अन्नाज रखे रखे सड़ गया। हम आपलोगों से
 
राजेश कुमार
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कुछ समस्याएं

बेशक ज़मानियाँ के स्वनामधन्य स्वतंत्रता सेनानियों, समाजसेवियों एवं देश सेवा में समर्पित जवानों, आईएएस-आईपीएस अफसरों, न्यायाधीशों, वैज्ञानिकों, प्रशासकों ने भी ज़मानियाँ का गौरव बढ़ाया है जिनकी फेहरिस्त लम्बी है, जिनका उल्लेख आने वाले समय में संभव है.
 
कुमार शैलेन्द्र