समझ लेना तुम
ये फिज़ायें गुनगुनाती हरदम, यह समझ लेना तुम।
ये वादियाँ तलाशती हमदम,यह समझ लेना तुम ॥
बहारें आयेंगी गर ,पतझड़ भी जरूर आयेगा,
यही चमन का नियम ,यह समझ लेना तुम॥
हवाएं सहलाती भी हैं,हवाएं झुलसाती भी हैं,
समन्दर में भी रहती है अगन,यह समझ लेना तुम॥
वफ़ा क
Oct 30 2009 12:38 AM



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