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देवभूमि भारत का सतत सांस्कृतिक प्रदूषण

आज से लगभग २,४०० वर्ष पूर्व देवों द्वारा विशुद्ध वैज्ञानिक चिंतन पर आधारित भारत का विकास किया जा रहा था जिसकी ख्याति सुदूर भूभागों में भी पहुँची. ऐसे भारत पर अधिकार करने हेतु कुछ षड्यंत्रकारियों ने योजना बनायी जिसके अंतर्गत भारत को  सांस्कृतिक रूप
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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सभ्यता और संस्कृति

आज पूरी मानव जाति की बुद्धिहीनता है कि वह सभ्यता और संस्कृति में अंतर कराना भूल बैठी है, और यह भूल ही इस सर्वश्रेष्ठ जाति को पतित कर रही है.  यह है इस अंतर को समझने का एक प्रयास.सभ्यता से हम भली भांति परिचित हैं - मानव की जीवन को बेहतर बनाने की सतत
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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आधुनिक इतिहास और पाराम्परिक समूहों का भविष्य (1)

"मैं और मेरा वक्त" आलेख संग्रह के लिए लिखा गया ओम  प्रकाश दीपक का यह विश्व की संस्कृति और सभ्यताओं के बीच होड़ तथा प्रभुत्व की आकाक्षाओं के विकास से उन्नीस सौ सत्तर के दशक तक के इतिहास का विषलेषण करते, आलेख का पहला हिस्सा प्रस्तुत है, जिसमें वह
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वेदों की मूल दुनिया

हर नयी यात्रा में मेरा प्रयत्न होता है कि कुछ नया पढ़ा जाये जिसे पढ़ने का घर पर आम व्यस्तता में समय नहीं मिलता. इस बार बँगलौर गया तो पढ़ने के लिए श्री राजेश कोच्चड़ की लिखी पुस्तक "वेदिक पीपल", यानि "वेदों के समय के लोग" पढ़ी. चूँकि आईसलैंड के ज्वालामुखी
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चिड़िया

चिड़िया तो आखिर चिड़िया है उसको बेचारी को कहां पता कि हम सभ्य हो रहे हैं और हमारा विकास पूरी प्रगति पर है । चिड़िया तो खोज रही है सूनी आंखों से अपना नन्हां सा घोसला और नन्हें बच्चों को जिन्हें वह अकेला छोड़ सुबह उड़ गई थी दानों की खोज में पर अब तो वहां कु
 
creativekona
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समय की अदालत में

क्षमा कर देना हमको ओ समय ! हमारी कायरता, विवशता, निर्लज्जता के लिये हमारे अपराध के लिये कि बस जी लेना चाहते थे हम अपने हिस्से की गलीज जिंदगी अपने हिस्से की चंद जहरीली साँसें भर लेना चाहते थे अपने फेफड़ों मे कुछ पलों के लिये ही सही कि हमने मुक्ति की का
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हो सकती है सरस्वती पुनर्प्रवाहित

सरस्वती के पुनर्प्रवाह हेतु सतत प्रयत्नशील सरस्वती नदी शोध संस्थान द्वारा 'सरस्वती नदी-एक परिदृश्य' शीर्षक के अन्तर्गत दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के राधाकृष्ण सदन में किया गया। इस अधिवेशन में देश-विदेश के अनेक
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टाइटैनिक डूबने वाला है, थोड़ा सो लें

में तो दुनिया का खात्मा होने के कोई चांस नहीं हैं। कम-से-कम इतना दावा करने में मुझे कोई हिचक नहीं है। माया सभ्यता के जिन लोगों के कैलंडर के हिसाब से यह कल्पना की जा रही है , उन्हें खुद अपने सफाये का अंदाजा नहीं रहा। पुराने जमाने की तमाम कौमें , जिन्ह
 
संजय खाती
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टाइटैनिक डूबने वाला है, थोड़ा सो लें

में तो दुनिया का खात्मा होने के कोई चांस नहीं हैं। कम-से-कम इतना दावा करने में मुझे कोई हिचक नहीं है। माया सभ्यता के जिन लोगों के कैलंडर के हिसाब से यह कल्पना की जा रही है , उन्हें खुद अपने सफाये का अंदाजा नहीं रहा। पुराने जमाने की तमाम कौमें , जिन्ह
 
संजय खाती
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सभ्यता समीक्षा के बड़े आलोचक हैं मुक्‍ति‍बोध- सुधीश पचौरी

सभ्यता समीक्षा के बड़े आलोचक हैं मुक्‍ति‍बोध सुधीश पचौरी मुक्‍ति‍बोध की चि‍न्‍ता के केन्‍द्रीय वि‍षय हैं प्रेम और सौंदर्य। बुनि‍यादी प्रश्‍न मुक्‍ति‍बोध की कवि‍ता में ही आ गया है 'समस्‍या एक - मेरे सभ्‍य नगरों और ग्रामों में सभी मानव सुखी सुंदर व
 
sudha singh
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एक सशक्त बेटी और एक स्नेहिल पिता की कहानी [एलिजाबेथ गैरेट-१]

[यह पोस्ट अभिषेक भईया को समर्पित है, उनकी यह पोस्ट पढ़कर ..हमने सोंचा हम भी लिख ही दें:-) यह तब की बात है जब लन्दन में लड़कियों का डॉक्टर बनना एक शर्मनाक बात मानी जाती थी. अठारवीं शताबदी में Newson Garrett और Louise Dunnell के घर एक बच्ची ने जन्म लिया
 
लवली कुमारी / Lovely kumari
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टिकुई कढ़ाई

पढ़ैयन से कुछ सुरुआती बातन के तौर पै 'टिकुई कढ़ावत' अही. सभ्यता कै विकास कै करम मा कइउ पायदान पै इन्सान चलत आवा, चढ़त आवा. आजु हमसब जौने पायदान पै अहन वहिपै टेक्नालजी हमसफ़र बनी अहै. तौ फिर जरूरी अहै कि यहिके साथे हमसफरै केस बिउहार कीन जाय. यही दिसा
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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बेगुनाह होने के गुनाह मे

हाँ इस सतरंगी, खूबसूरत ख़्वाबों वाली खुदगर्ज़ दुनिया से बस ढेला भर की दूरी पर ही सफ़ेद कालर वाले आदमखोर अँधेरे ने उस भदेस, निरीह बस्ती पर ढाये थे पुलिसिया जुर्म, हाँ वहीं कहीं पर था रात के ग़लीज़ गुनाहों का गवाह एक डरा हुआ दश्त जिसका गला काट कर उन्होने उस
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कड़वी ‘करी’ (भाग – 2)

कड़वी ‘करी’ (भाग – 1) माइग्रेशन के तार सभ्यता के विकास से जुड़े हुए हैं। बड़ा अजीब है कि आधुनिक सभ्यता को विकास का लांचिंग झटका भी एक अलग ढंग के माइग्रेशन से ही मिला। यह लुटेरे यूरोपियन्स का माइग्रेशन था, जिनका दंश एशिया, अफ्रीका, अमेरिका, आस्ट्रेलिय
 
गिरिजेश राव