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तो फिर बस

दूर हो जाएं आपसे कोई गम न हो बस चाहें इतनाकुछ कमी लगे जब हम न होंहर एक खुशी में आपकी शामिल होंना हो सामने तो हमारी यादें होंहमारे आपके रिश्ते की डोर इतनी पावन होजिसका गवाह प्रकृति और कण-कण होइस दोस्ती के अनमोल रिश्ते में न कोई विघ्न होन विषाद की रेखा न
 
अनिल पाण्डेय
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खामोशियां हैं आसपास और कुछ सवाल भी

खामोशियां हैं आसपास और कुछ सवाल भीकुछ रास्ता है सीधा सा और कुछ है आसपास जाल भीमुकद्दर ले जा रहा है जाने कहा और किस ओर है मंजिलधुधली हैं राहें….दूर होता है साहिल…..काश कोई संभाले कुछ देर को ही सहीइस वक्त और दूर जाते लम्हों की कहानी..... दूरियां हैं
 
अनिल पाण्डेय