पसंद करें
1
नापसंद करें

मंहगाई

मंहगाई -- सत्येन्द्र झा दो पुराने मित्र वर्षों बाद मिले थे। कुशलक्षेम के बाद एक मित्र के आग्रह पर दूसरे मित्र उनके घर आये। फिर शुरू हुआ पहले मित्र की सम्पन्नता का वर्णन। आगंतुक के पूछे बिना ही उन्होंने कहना शुरू किया, "यह एलसीडी टीवी है, पचास हज़ार का...
 
करण समस्तीपुरी
पसंद करें
0
नापसंद करें

पशु

-- सत्येन्द्र झा किसी साहित्यिक दिवस पर लेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। लेख का विषय था 'पशु की उपयोगिता'। पुरस्कृत लेखक ने लिखा था, "पशु की उपयोगिता मनुष्य से अधिक होती है, क्यूंकि प्रत्येक मनुष्य के अन्दर एक पशु रहता है। जब यह पशु बाहर आ कर मनुष्य
 
करण समस्तीपुरी
पसंद करें
0
नापसंद करें

विभेद

  विभेद -- सत्येन्द्र झा     दो लाश एक साथ जलाए जा रहे थे। उन में से एक खूब ताम-झाम के साथ.... लोगों की भारी भीड़ लगी थी उसके इर्द-गिर्द। दूसरी उदास कर्म की उदास प्रक्रिया के साथ। अमीर की लाश के पास खड़ी भीड़ मृतक का प्रशस्ति गान कर रही
 
मनोज कुमार
पसंद करें
0
नापसंद करें

दूसरा रूप

-- सत्येन्द्र कुमार झानयी दुल्हन ससुराल में आते ही पहले टीवी, फिर फ्रीज़, वीसीडी और कूलर की फरमाईस करने लगी। ससुराल की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। सास, ससुर और पति ने यह 'ऐश्वर्य' जुटाने में असमर्थता व्यक्त किया। ये लो... दुल्हन ने तो अनशन ही शुरू कर
 
करण समस्तीपुरी
पसंद करें
0
नापसंद करें

आधुनिक

- सत्येन्द्र झा कक्षा में शिक्षक छात्रों को आधुनिक बनने की शिक्षा दे रहे थे। उन्होंने कहा, "बिना आधुनिक बने विश्व के साथ कदम मिलाना असंभव है।” एक छात्र इसका अर्थ नहीं समझ पाया। उसने प्रश्न किया, "सर! थोड़ा स्पष्ट कर के कहें!"   शिक्षक
 
मनोज कुमार
पसंद करें
0
नापसंद करें

जल्लाद

नमस्कार मित्रों !पिछले सप्ताह हम ने सत्येन्द्र झा जी की एक लघु-कथा "कुत्ते की मौत" प्रकाशित की थी और आपने उसे सर-आँखों पर बिठाया था। आपके स्नेह से अभिभूत हमने झाजी से उनकी कथाओं के नियमति प्रकाशन की आज्ञा प्राप्त कर ली है। सत्येन्द्र झा उदीयमान मैथिली
 
करण समस्तीपुरी
पसंद करें
1
नापसंद करें

कुत्ते की मौत

प्रतिभा कहाँ छुपी हो सकतीहै... किसे पता ? श्री सत्येन्द्र झा साहित्य-जगत में बिलकुल अनसुना नाम है ! महोदयजल में कमल की भांति साहित्य की एकांत साधना में लीन हैं। झा जी सम्प्रतिआकाशवाणी के दरभंगा केंद्र में लेखापाल के पद पर कार्यरत हैं। आप ने अपनी रचनाओं
 
करण समस्तीपुरी