ग्यारह साल पूरे…
लगता है कल ही की बात है जब हम थे कुआँरे निपट बेचारे फिर बारात सजाकर गये थे दूल्हा बने सबने नाच-नाच कर जश्न मनाया ससुरालियों ने हमें खूब बनाया लेकिन हमें खूब भाया रचना से सृजन सुनहरा दौर शुरू हुआ पहले बेटी, फिर बेटा वागीशा, सत्यार्थ उसके बाद
May 01 2010 12:09 AM



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