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सत्य की उपलब्धि के नाम पर – कविता – रवि कुमार

सत्य की उपलब्धि के नाम पर ( a poem by ravi kumar, rawatbhata) सत्य कहते हैं ख़ुद को स्वयं उद्‍घाटित नहीं करता सत्य हमेशा चुनौती पेश करता है अपने को ख़ोज कर पा लेने की और हमारी जिज्ञासा में अतृप्ति भर देता है कहते हैं सत्य बहुत ही विरल है उसे खोजना अपने आप
 
रवि कुमार, रावतभाटा
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सत्य की उपलब्धि के नाम पर – कविता – रवि कुमार

सत्य की उपलब्धि के नाम पर ( a poem by ravi kumar, rawatbhata) सत्य कहते हैं ख़ुद को स्वयं उद्‍घाटित नहीं करता सत्य हमेशा चुनौती पेश करता है अपने को ख़ोज कर पा लेने की और हमारी जिज्ञासा में अतृप्ति भर देता है कहते हैं सत्य बहुत ही विरल है उसे खोजना अपने आप
 
रवि कुमार, रावतभाटा
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Request as a order बहन फ़िरदौस की ख़ातिर भाई एजाज़ इदरीसी से एक पठानी विनती

बहन फ़िरदौस साहिबा ! आप एक आला तालीमयाफ़्ता ख़ातून हैं । आपने एजाज़ की पोस्ट से आहत होकर अपने ब्लॉग के साथ ज़्यादती कर डाली । आपके अमल से आपकी हस्सासियत ए तबअ और नज़ाकत ए क़ल्ब का पता चलता है । आपके दुख से हम भी बहुत दुखी हैं । हम आपकी भी क़द्र करते हैं और
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ईश्वर की पहचान

आप जानते हैं कि कैसे एक ग्रामीण व्यक्ति या किसान उस प्रतिमा को ईश्वर मान लेता है जिस पर वह कुछ फल फूल आदि चढ़ाता है। आदिम मानव बादलों के गरजने को ईश्वर का इशारा समझता था कुछ अन्य मनुष्य पेड़-पौधों प्रकृति को भगवान मानते हैं। जैसे हमारे देश में पीपल, बरगद
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झूठ

कुछ झूठ समाज में स्थापित मूल्य बनकर सत्य के सिंहासन पर आरुढ़ होने का दावा करते हैं ।दूसरे दिन: पुनश्च : आपके मन में उक्त उक्ति से जो भी भाव आया, कृपया उसे टिप्पणी के रूप में देकर अनुगृहीत करें ।
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मैं और हस्तकला (एस.यू.पी.डब्ल्यू.)(व्यंग्य/कार्टून)

बात उन दिनों की है जब मैं स्कूल में पढ़ा करता था। पढ़ा क्या करता था बस यूं ही जब घर बैठे-बैठे बोर हो जाता था तो स्कूल तक चला जाता था । वैसे स्कूल जाना मेरी मजबूरी भी थी और शौक भी । मजबूरी इसलिये क्योंकि हमारे खनादान में सभी पढ़े-लिखे थे इसलिये मुझे [...
 
K M Mishra
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