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कीचड़ में कमल - चरन कमल

हमरा त आदत है देर से सोकर उठने का. लेकिन जईसहीं हमरा नींद खुला, देखे कि राजू आँख बंद किए चला जा रहा है. घबड़ा गए हम कि इसको नींद में चलने का बीमारी है, ई त हमको पते नहीं था. हमरा एतना अच्छा दोस्त अऊर ई बीमारी… कभी बोलबे नहीं किया. हमरा सोच तनी थम गया, जब
 
चला बिहारी ब्लॉगर बनने
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शब्दलेख सारथी

मनु महाराज के अनुसार -------------------------अति वादांस्तितिक्षेत नावमन्येत कञ्चन्न चेमं देहमाश्रित्य वैरं कुर्वीत केनचित्। हिन्दी में भावार्थ-सन्यासी और श्रेष्ठ पुरुषों को दूसरे लोगों द्वारा कहे कटु वचनों को सहन करना चाहिए। कटु शब्द (गाली) का
 
दीपक भारतदीप
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भर्तृहरि नीति शतक-स्त्री तथा देवता एक ही होना चाहिए (woman and god-hindu dharma sandesh

एको देवः केशवो वा शिवो वा ह्येकं मित्रं भूपतिवां यतिवां।एको वासः पत्तने वने वा ह्येकं भार्या सुन्दरी वा दरी वा।।हिन्दी में भावार्थ-मनुष्य को अपना आराध्य देव एक ही रखना चाहिये भले ही वह केशव हो या शिव। मित्र भी एक ही हो तो अच्छा है भले ही वह राजा हो या
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मनुस्मृति-वेद मंत्रों के जाप से इच्छित फल प्राप्त होता है (manu smriti-ved mantra ka jap)

इदं शरणमज्ञानामिदमेव विजानताम्।इदमन्विच्छतां स्वर्गमिदमानन्त्यमिच्छताम्।।हिन्दी में भावार्थ-मनुष्य ज्ञानी हो या अज्ञानी वेद मंत्रों को जपने से उसे इच्छित फल प्राप्त होता है। उसी तरह इनके जाप से स्वर्ग की इच्छा करने वालो को स्वर्ग तथा मोक्ष प्राप्त करने
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श्रीगुरु ग्रंथ साहिब-दहेज में केवल हरि का नाम दान दें (dahej men hari ka nam-shriguru granth sahib)

‘हरि प्रभ मेरे बाबुला, हरि देवहु दान में दाजो।’हिन्दी में भावार्थ-श्री गुरुग्रंथ साहिब में दहेज प्रथा का आलोचना करते हुए कहा गया है कि वह पुत्रियां प्रशंसनीय हैं जो दहेज में अपने पिता से हरि के नाम का दान मांगती हैं। दहेज प्रथा पर ही प्रहार करते हुए यह
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मनुष्य के दोहरे व्यक्तित्व ने बनाया है समाज को विकृत

कभी-कभी विचार आता है कि व्यक्ति कैसे एक पल में अपने संस्कारों को भूल जाने की बात करता है और दूसरे ही पल वह उनका निर्वहन करता दिखाई देता है। कभी वह संस्कारों को रूढ़ियों का नाम देकर उसके निर्वहन करने वालों को कोसता है, बुरा-भला कहता है और एक दिन स्वयं ही
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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संत कबीर दास-हृदय में समान भाव से ही शीतलता की अनुभूति संभव (shitalta ki anubhuti-kabir vani)

सीतलता तब जानिये, समता रहै समाय।विष छोड़ै निरबिस रहै, सब दिन दूखा जाय।।संत शिरोमणि कबीरदास के अनुसार अपने हृदय में शीतलता तभी अनुभव कर सकते हैं जब मन वचन तथा प्रत्येक कर्म के प्रति समता का भाव मन में आ जाये। अपने अंदर यह दृढ़ भाव रखते अहंकार रूप विष का
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चाणक्य नीति दर्शन-कुसंस्कारी में सुधार की अपेक्षा व्यर्थ (sanskar aur satsang-hindi sandesh)

अंतर्गतमलो दृष्टस्तीर्थस्नानशतैरपि।न शुध्यति यथा भाण्डं सुराया दाहितं च यत्।।हिंदी में भावार्थ-जिसके मन में मैल भरा है ऐसा दुष्ट व्यक्ति चाहे कितनी बार भी तीर्थ पर जाकर स्नान कर लें पर पवित्र नहीं हो पाता जैस मदिरा का पात्र आग में तपाये जाने पर भी पवित्र
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संत कबीर वाणी-प्रेम प्रसंग कभी न कभी प्रकट होते हैं (prem prasang aur samaj-kabir vani)

पर नारी पैनी छुरी, विरला बांचै कोयकबहुं छेड़ि न देखिये, हंसि हंसि खावे रोय।संत कबीर दास जी कहते हैं कि दूसरे की स्त्री को अपने लिये पैनी छुरी ही समझो। उससे तो कोई विरला ही बच पाता है। कभी पराई स्त्री से छेड़छाड़ मत करो। वह हंसते हंसते खाते हुए रोने लगती है।
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संस्कार

संस्कार शब्द का अर्थ है, शुद्धिकरण। जीवात्मा जब एक शरीर को त्याग कर दूसरे शरीर में जन्म लेना है, तो उसके पूर्व जन्म के प्रभाव उसके साथ जाते हैं। इन प्रभावों का वाहक सूक्ष्म शरीर होता है, जो जीवात्मा के साथ एक स्थूल शरीर से दूसरे स्थूल शरीर में जाता ह
 
Dharmayan
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परिवार और संस्कार…

बचपन के सच बचपन की तरह कितने कोमल और सहज होते हैं । कभी चांद को आंगन में उतार लाने की हठ का सच! कभी आंगन में फुदकती गौरैया को पकड़ने की अजानी कोशिश का सच और कभी झाड़ू की सींक से बनाए गुड़िया के स्वेटर बुनने का सच! याद आती है वो पुराने स्वेटरों की उधड़ी [...]
 
satyanshu
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संत कबीर के दोहे: ज्ञान स्वयं समझा नहीं दूसरों पर झाड़ते हैं

पढ़त गुनत रोगी भया, बढ़ा बहुत अभिमान भीतर ताप जू जगत का, घड़ी न पड़ती सान संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि पढ़ते और गुनते हुए आदमी का अभिमान बढ़ता गया। उसके अंतर्मन में जो तृष्णाओं और इच्छाओं की अग्नि जलती है उसके ताप से उसे मन में कभी शांति नहीं म
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लुप्त होते संस्कार और मीडिया का योगदान

कल शाम को मै यूँ ही बुद्धू बक्से के सामने बैठ गया. तभी किसी खबरिया चैनल पर एक डिफ्रॅट टाइप का विज्ञापन दिखाई दिया. जो दिखाता है कि एक विदेशी पर्यटक के साथ किसी लोकल (स्थानीय) ने बुरा व्यवहार किया और हमारे गज़नी खान यानि आमिर खान जी लोगॉ को सिखाते है क
 
मनुदीप यदुवंशी