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दौड़ के आओ.. देखो कौन दम तोड़ रहा है? >दीपक 'मशाल'

माहौल बड़ी तेजी से बदल रहा है.. शहर बढ़ रहे हैं और संवेदनाएं घट रही हैं......ये सब किसी दिलचस्प फिल्म का क्लाइमेक्स नहीं बल्कि बदलते परिवेश का सच है.
 
दीपक 'मशाल'
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समालोचना !!!

सम्पूर्ण श्रृष्टि में चर चराचर, प्रत्येक उद्यम सुख और आनंद प्राप्ति के निमित्त ही तो करते हैं. परन्तु समस्या यह है कि सुख आनंद विभिन्न श्रोतों द्वारा जितना अधिक हम लेने / जोड़ने में तत्पर रहा करते हैं, उतना किसी को देने में नहीं. जबकि यदि हम सचमुच ही