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समीकरण बैठाए कितने?

१- साँसों से अनुबंध हुआ कब? पंजीकरण सब फेल हुए हैं। समीकरण बैठाए कितने? फिर भी वे सब बेमेल हुए हैं॥ २- अनुबंधों की क्या हैं सीमाएँ? हमने तो अब तक न जाना । रिश्तों में कैसा समीकरण हो? दिल ने अब तक न पहचाना॥ ३- जीवन की अँधी दौड़ में, प्यार का इक क्षण [...]
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आँखों का हर एक गौहर

दिल में उतर गए तुम , आँखों की राह चलकर । दिल से निकल गए तुम , आँसू की बूँद बन कर॥ आँखों का हर एक गौहर, तेरे लिए छुपाया । आँखों का हर एक गौहर, तुम पर ही था लुटाया ॥ दोनों तरह लुटे हम , तेरी वफ़ा के चलते। तुम तो समझ सके [...]
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सिर्फ़ प्यार कर

मैंने तो दिल की गहराइयों से चाहा तुमको, और तुमने मेरी चाहत को सस्ता समझा मेरी भावनाओं से खेल कर क्या मिला तुमको? प्यार को तुमने क्यों खिलवाड़ समझा? तुमने अभी तक मेरे प्यार की नम्रता देखी है, अब तुम उसकी कठोरता भी देखोगे, नारी प्यार में मिट [...]
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सपने गढ़े जाते हैं

सपने सच होते नहीं सपने गढ़े जाते हैं कुम्हार की मिट्टी की तरह । अनगढ़ मिट्टी में सपनों के बीज नहीं बोए जाते । जैसे कुम्हार पहले मिट्टी को तैयार करता है तब कल्पना का चक्र घुमाता है फिर उस पर मिट्टी का लोंदा रखकर हाथों की उंगलियों से मनचाहा रूप [...]
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चार शब्द चित्र

चार शब्द चित्र 1- बने मेघ गर तुम, मैं नीर बनी हूँ , जब बरसे गरजकर, मैं धीर बनी हूँ । २- लगाई थी बिंदिया तेरा नूर लेकर, तेरे ही लबों की, मैं लाली बनी हूँ । ३- पिया जाम तुमने मैं मदिरा बनी हूँ, , बहके कदम जब, मैं संग -संग चली हूँ [...]
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समझौता भाता नहीं।

जब किसी से जुड़ता है दिल मेरा दिल दीवानगी को पार कर जाता है। और जब टूटता है दिल मेरा, दिल दुख की दीवानगी में डूब जाता है। क्या करें इस दिल का, समझौता इसे भाता नहीं। और दिल की उन गहराईयों तक, समझने के लिए कोई आता नहीं। इस दुनिया में दिल की बात करना, ख
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