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ये लज्जा तो केवल संयम

बोलूँ ना बोलूँ ......सोच रही.बोलूँगी क्या फिर सोच रही.मन में बातें ...करने की है इच्छा, लज्जा पर रोक रही. कुछ है मन में थोड़ा-सा भय. संकोच शील में होता लय.पलकों के भीतर छिपे नयन मन में संबोधन का संशय. "प्रिय, नहीं आप मेरे प्रियतम मन में मेरे अब भी है
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छोड़ संयम बन रहे हैं यम : मासूम को पटक पटक कर मार डाला

लिंक देखिए यह छोड़ संयम बन रहे हैं यम समाचार है लगभग सभी समाचार पत्रों में। क्‍या हो रहा है समाज को क्‍यों उपज रही है पाशविकता इंसान में। बन रहा है शैतान जिसके सर पर रहती है हर समय हैवानियत सवार। इसका कैसे हो उपचार इस पर करें हम सब मिल कर विचार। पटकन
 
अविनाश वाचस्पति
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