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‘कामरेड’ का टूट गया तिलिस्म-हिन्दी लेख

आखिर कामरेड शब्द का तिलिस्म टूट गया। कहना कठिन है कि चीन में साम्यवादी व्यवस्था एकदम खत्म हो जायेगी पर इतना तय कि कामरेड शब्द से पीछा छुड़ाना इसकी एक शुरुआत का संकेत हो सकती है। मार्क्सवाद पर आधारित विचारधाराओं का आधार केवल नारे और वाद हैं और कामरेड
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हिंदी का बुद्धिजीवी

लेखक संगठनों के पुनर्गठन का मसला इस संपादकीय के साथ जोड़ कर देखा जाएगा तो परिवर्तन की जरूरत और शिद्दत से महसूस होगी. माहौल को गरियाना , राजनीति को लतियाना , युवा पीढ़ी पर बिगड़ जाने के फतवे जारी करना और फिर व्यवस्था के मत्थे दोष मढ़ देना एक फैशन है।
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मंचों का ठाठ

संदर्भ हिन्दस्वराज का शताब्दी वर्षमंचों का ठाठसजग, जागरूक भारतीय के मन में एक विचार कौंधता है, गांधीजी आज यदि जिंदा होते, तो उनकी स्थिति क्या होती? गांधीजी यदि आज होते, तो भारतीय राजनीति और करोड़ों जनता की स्थिति क्या होती?अच्छा हुआ गांधीजी हमारे बीच
 
Kumar Anurag
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मंचों का ठाठ

संदर्भ हिन्दस्वराज का शताब्दी वर्ष मंचों का ठाठ सजग, जागरूक भारतीय के मन में एक विचार कौंधता है, गांधीजी आज यदि जिंदा होते, तो उनकी स्थिति क्या होती? गांधीजी यदि आज होते, तो भारतीय राजनीति और करोड़ों जनता की स्थिति क्या होती? अच्छा हुआ गांधीजी हमारे
 
Arun Kumar Jha
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संपादकीय

हिन्दी का ब्रह्मभोजराष्ट्र की भाषा, राज-काज की भाषा, जन-जन की भाषा, वह भाषा, जो सैंकड़ों देशों में बोली जाती है। वह भाषा, जो सहृदय है और देशज, आंचलिक सभी बोलियों को अपने हृदय में समोये हुए है। वही भाषा हिन्दी आज अपने ही देश में वधिवा -विलाप कर रही है।
 
Arun Kumar Jha
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हिन्‍दी दिवस संपादकीय

हिन्दी का ब्रह्मभोज रविवार, 20 सितम्बर 2009 23:01 | राष्ट्र की भाषा, राज-काज की भाषा, जन-जन की भाषा, वह भाषा, जो सैंकड़ों देशों में बोली जाती है। वह भाषा, जो सहृदय है और देशज, आंचलिक सभी बोलियों को अपने हृदय में समोये हुए है। वही भाषा हिन्दी आज अपने ही
 
Kumar Anurag