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कैसी अच्छाई? किसकी प्रशंसा?

सीटा के ईसाई मठ में महंत लूकास ने एक दिन सभी शिष्यों को प्रवचन के समय कहा :- “ईश्वर करे कि तुम सभी भुला दिए जाओ”. “यह आप क्या कह रहे हैं?” – उनमें से एक ने कहा – “क्या इसका अर्थ यह है कि कोई भी हमसे जगत के कल्याण
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आद्य शंकराचार्य

वेदांत के आदि गुरु श्री आद्य शंकराचार्य का जन्म लगभग 11 शताब्दी पूर्व त्रावणकोर के एक मलयाली ब्राह्मण के घर हुआ था. वे बहुत छोटे थे तभी उनके पिता का निधन हो गया. बचपन में ही उन्होंने वेदों और वेदांगों का पूरा अध्ययन कर लिया. उनके मन में सन्यस्त होने
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“कौन है? : जलालुद्दीन रूमी की कहानी

कौन है? : जलालुद्दीन रूमी की कहानी किसी ने अपनी प्रियतमा के द्वार को खटखटाया. भीतर से आवाज़ आई – “कौन है?” उसने कहा – “यह मैं हूँ!” द्वार के भीतर से आवाज़ आई – “इस घर में मैं और तुम एक साथ नहीं रह सकते