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कनिष्‍क कश्‍यप जी ने ब्‍लॉग प्रहरी को बंद कर दिया है ... ब्‍लॉग 4 वार्ता ... संगीता पुरी

रविवार तीन बजे तक आए पोस्‍टों को लेते हुए मैं संगीता पुरी यह वार्ता कर रही हूं ..  क्‍यूंकि उससके बाद मैं इंटरनेट से दूर किसी और शहर में एक खास कार्यक्रम में सम्मिलित होने चली गयी हूं  .. 26 और 27 अप्रैल को झारखंड बंद होने की वजह से मैं लौट भी
 
संगीता पुरी
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रविवार के कुछ विशेष चिट्ठों का अवलो्कन---ब्लाग4वार्ता-----संगीता पुरी

कई दिनों से दूसरे महत्‍वपूर्ण कार्यों में व्‍यस्‍तता के बावजूद ब्‍लॉग जगत पर निगाह बनी रही ..... भले ही आप लोगों को मेरी टिप्‍पणियां न मिली हो ....  क्षमा चाहती हूं ... व्‍यस्‍तता इतनी थी कि सप्‍ताह भर से अपने तीनो ब्‍लोगों को अपडेट करने का मौका भी
 
संगीता पुरी
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बोदूराम की खोज खबर--महफूज भाई का पता चला----ब्लाग4वार्ता --"संगीता पुरी"

आज 21 मार्च है , गणित ज्‍योतिष में इस दिन का बडा महत्‍व है , क्‍यूंकि आज पृथ्‍वी पर 12 घंटे का दिन और बारह घंटे की रात होती है। इससे पूर्व भारतवर्ष में दिन छोटे और रात बडी हो रही थी , आज के बाद यहां दिन बडे और रातें छोटी होने लगेंगी। वैसे इस खास दिन का
 
संगीता पुरी
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गत्यात्मक ज्योतिष की प्रवर्तिका संगीता पुरी जी से पॉड कास्ट इंटरव्यू

  संगीता पुरी जी उम्र: 46 लिंग: स्त्री खगोलीय राशि: धनु          राशि वर्ष: खरगोश स्थान: बोकारो : झारखंड : भारत/ आत्म कथ्य :-पोस्‍ट-ग्रेज्‍युएट डिग्री ली है अर्थशास्‍त्र में .. पर सारा जीवन समर्पित कर
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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दूसरी हार [कहानी] - संगीता पुरी

दो घनघनाहट के बाद फोन की घंटी बजनी बंद हो गयी। उसने घडी की ओर देखा, पौने दस बज रहे थे। एस टी डी की आवाज सुनकर वह समझ ही चुकी थी कि फोन कहीं दूर से ही आ रहा होगा। दिनभर तो अडोस पडोस के घरों से आए फोन की वजह से घंटी बजती ही रहती है, सामान्‍य दूरी वाली
 
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दूसरी हार [कहानी] - संगीता पुरी

दो घनघनाहट के बाद फोन की घंटी बजनी बंद हो गयी। उसने घडी की ओर देखा, पौने दस बज रहे थे। एस टी डी की आवाज सुनकर वह समझ ही चुकी थी कि फोन कहीं दूर से ही आ रहा होगा। दिनभर तो अडोस पडोस के घरों से आए फोन की वजह से घंटी बजती ही रहती है, सामान्‍य दूरी वाली
 
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थम गया तूफ़ान [कहानी] - संगीता पुरी

किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आनेवाला वह तूफान कितना भी भयानक क्यों न था, भले ही उसने मानचित्र से कई गॉवों या शहरो का अंत कर डाला था, उस क्षेत्र के आधे से अधिक लोगों की जानें ले ली थी, सारी संपत्ति को तहस-नहस कर डाला था, परंतु उससे मेरा क्या बिगड़ा था
 
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काश अपराधियों को पता होता ..... जान कितनी कीमती होती है !!

वैसे तो मेरी टी वी देखने की अधिक आदत नहीं ,पर कल शाम साढे सात बजे टी वी खोलकर बैठ गयी। शायद आई बी एन 7 पर एक कहानी दिखायी जा रही थी , एंकर की ओर से ही उसका इतने रोचक ढंग से प्रस्‍तुतीकरण किया गया कि मैं उसी चैनल पर अंटकी रह गयी। प्राचीन काल की बात है
 
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मिथ्या भ्रम [कहानी] - संगीता पुरी

क्‍या हुआ, ट्रेन क्‍यूं रूक गयी ?’ रानी ने उनींदी आंखों को खोलते हुए पूछा। ’अरे, तुम सो गयी क्‍या ? देखती नहीं , बोकारो आ गया।‘ बोकारो का नाम सुनते ही वह चौंककर उठी। तीन दिनों तक बैठे बैठे कमर में दर्द सा हो रहा था। कब से इंतजार कर रही थी वह , अपने ग
 
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