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हनुमत प्रार्थना --बड़ा मंगल ....डा श्याम गुप्त ...
हनुमान जी – प्रार्थना (१.)(मनहरण कवित्त-३१ वर्ण,१६-१५ ,अन्त गुरु )दुर्गम जगत के हों कारज सुगम सभी , बस हनुमत गुण- गान नित करिये । सिन्धु पारि करि,सिय सुधि लाये लन्क जारि, ऐसे बजरन्ग बली का ही,ध्यान धरिए ।करें परमार्थ सत कारज निकाम भाव , । ,ऐसे उपकारी
Jun 01 2010 08:31 AM



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