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अजेय की कविताएँ / हिमालय की कविताएँ : एक लम्बी पोस्ट

आत्मकथ्य इन कविताओं में हिमालय का घूमंतू जीवन है. हिमालय के भीतर और ट्रांस हिमालय के आदिम समुदायों में दो तरह की जीवन धाराएं हैं एक जो सेटेल्ड है, और दूसरा जो पशुपालक है और अभी तक ख़ानाबदोशों का जीवन जी रहा है. मैं उस सेटेल्ड समुदाय से आता हूँ जिस के पास
 
शिरीष कुमार मौर्य
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गिरिराज किराडू की कविताएँ

अनुनाद के भले दिन लगे हैं। मनोज के बाद अब हमें गिरिराज की कविताएँ मिली हैं। एक आम शिकायत है कि गिरि की कविताओं में कला है ! उसे महज कलाकार मानने और दूसरों से भी ऐसी उम्मीद रखने वाले बहुत सारे आत्मीय मित्र हैं मेरे। जी हाँ... इनमें कला है लेकिन वो कला, जो
 
शिरीष कुमार मौर्य
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मनोज कुमार झा की कविताएँ - दूसरी किस्त

मुझे बस उत्सव में शामिल कर लो तस्वीर और वक्तव्य प्रतिलिपि से साभार बाँसक ओधि उखाड़ि करै छी जारनिहमर दिन नहि घुरतकि हे जगतारिनि(नागार्जुन, पत्रहीन नग्न गाछ, १९६८)(बाँस की जड़ें खोदकर लाता और मात्र वही जलावन, ऐ जगतारनी क्या मेरे दिन नहीं फिरेंगे?)एक स्त्री
 
शिरीष कुमार मौर्य
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मनोज कुमार झा की कविताएँ

मनोज कुमार झा की कविताओं को "युवा कविता" का लेबल देते हाथ ठिठक गए ...फिर सही लेबल दिया "श्रेष्ठ हिंदी कविता" ! जी हाँ - यह नौजवान साथी प्रगतिशील हिंदी कविता की परंपरा से जीवनद्रव खींचता हुआ हमारे समय की श्रेष्ठ हिंदी कविता लिख रहा है। बिहार की धरती
 
शिरीष कुमार मौर्य
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दहशत : हरीशचन्द्र पाण्डे की एक कविता

दहशतपारे सी चमक रही है वहमुस्कुराते हुए होंठों के उस हलके दबे कोर को देखोजहाँ से रिस रही है दहशतएक दृश्य - अपने अपने भीतर बनते बंकरों काएक ध्वनि - फूलों के चटाचट टूटने कीएक कल्पना - सारे आपराधिक उपन्यासों के पात्रजीवित हो गए हैंबहिष्कृत स्मृतियाँ लौटी
 
भारत भूषण तिवारी
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गीत को बधाई दें !

हमारा प्रिय कवि गीत अब अपना संग्रह "आलाप में गिरह" लाया है, जिसका मुझे कुछ समय से बेहद इंतज़ार था। संग्रह तो अभी मुझे नहीं मिला पर यहाँ हमारे पास उसका ख़ूबसूरत जैकेट है और गीत की एक नई अप्रकाशित कविता भी। मैं अपने इस साथी को बधाई देता हूँ। गीत की कविता
 
शिरीष कुमार मौर्य
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एक छूटा हुआ मकान - विजय कुमार

अग्रज कवि विजय कुमार का नाम समकालीन कविता और कवितालोचना में एक विशिष्ट, महत्वपूर्ण और ज़रूरी नाम है। विजय कुमार जी ने अपने सतत् अनुवादकर्म से विदेशी कविता और समालोचना को जानने-पहचानने की समझ भी हमें दी है। उनकी कविताएं हमारे भग्नावशेष समय में एक समूची और
 
शिरीष कुमार मौर्य
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पंकज चतुर्वेदी की दो कविताएँ

हाल ही में लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है और इस सन्दर्भ में संबोधन के कविता विशेषांक में छपी पंकज चतुर्वेदी की ये दो कविताएँ मुझे बेहद प्रासंगिक लगीं। कविता की बेहद ज़रूरी सामाजिक-राजनीतिक भूमिका को ध्यान में रखते हुए आ
 
शिरीष कुमार मौर्य
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आओ,पर्चे बांटें - लाल्टू की एक कविता

आओ, पर्चे बांटें आओ , पर्चे बांटें उन कविताओं के जिन्हें न जाने कब से हमने नहीं लिखा उन सभी ख़तरनाक कविताओं के पर्चे बांटें जिनमें हैं सभी प्रतिबंधित शब्द हैं जिनमें कोलाहल है प्यार ( संकलन ' डायरी में तेईस अक्तूबर ' से )
 
भारत भूषण तिवारी
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तीन प्रेम कविताएँ - पंकज चतुर्वेदी

वह सैंडविच वह सैंडविच जो तुमने विदा होते समय दी थी ट्रेन में रात साढ़े नौ बजे मेरे इसरार के बावजूद कि घर पर माँ खाने पर इन्तिज़ार कर रही होंगी वह एसएमएस कि `मैं तुमसे सम्मोहित हूँ´ मैंने भेजा तुम्हें आधी रात के नशे में अन्यथा इतना साहस कहाँ देता है समा
 
शिरीष कुमार मौर्य
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बाबा नागार्जुन की कविता .....

युवा आलोचक प्रियम अंकित अनुनाद के सहलेखक हैं पर इंटरनेट की कुछ बुनियादी परेशानियों के कारण अपनी पहली पोस्ट नहीं लगा पा रहे थे - अपना संकोच तोड़ कर अब उन्होंने अपनी यह पोस्ट मेल से भेजी है जिसे मैं ज़्यादा कुछ न कहते हुए नीचे चस्पां कर रहा हूँ.........
 
शिरीष कुमार मौर्य
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नरेश सक्सेना की कविता

१९९४ के दिन थे जब मैं छात्र- राजनीति, वाल- राइटिंग, स्नातक अन्तिम वर्ष में विज्ञान की पढ़ाई, रेखाचित्र बनाने और कविता लिखने जैसे कई-कई मोर्चों पर पूरे उत्साह से एक साथ जुटा रहता था और मेरी दोस्त सीमा अक्सर पूछती थी कि शिरीष तुम किस धातु के बने हो ? ब
 
शिरीष कुमार मौर्य
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लाल्टू की कविताएँ

लाल्टू को मैं उनके पहले संग्रह `एक झील थी बर्फ़ की´ से जानता हूं। मुझे वे कविताएं अच्छी लगीं और इधर नेट पर उनका दूसरा संकलन `डायरी में तेईस अक्टूबर ´ नाम से मिला। लाल्टू हमारे विराट संसार में घट रही तरह-तरह की घटनाओं और लगातार मर और पैदा हो रही कुछ छ
 
शिरीष कुमार मौर्य