श्री रामचँद्र कृपालु भजु मन
श्री रामचँद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्।नवकंज-लोचन, कंज-मुख, कर कंज, पद कंजारुणम्।।कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरद सुंदरम्।पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक-सुतानरम्।।भजु दीनबंधु दिनेश दानव-दैत्य-वंश-निकंदनम्।रघुनंद आनँदकंद कोशलचंद
Mar 23 2010 10:38 PM



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