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नइए भरोसा संगवारी-रागी

नइए भरोसा संगवारी-रागीहवा पानी अउ आगी।नइए भरोसा संगवारी रागी॥दाई बहनी सबके खाथे किरिया।नइए लाज शरम पिरिया॥न दाई ल, दाई जानत हे।न बहिनी ल, बहनी मानत हे॥सबके ऐके ठन राज आय।धन-दौलत अउ काज आय॥मोर खेत कइके बताथे लबरा।देखे जाबे त दीखत हे डबरा॥लबरा के मुंह बड़े
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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बखत के घोड़ा

खावत हे, पियत हेरातदिन मारा-मारी जियत हेबिन लगाम दउड़त हेबखत के घोड़ा।रात हर दिन हो जाथेदिन हर रात हो जाथेबिन काम होय आरामलागथे मनखे ल हरामआज ये डहरकाल ओ डहरये शरीर बन जाथेकोदो कस गरू बोराबखत के घोड़ा।चलगे जेकर पांव के टापूमुड़ के नई देखय पाछूयेहर अपन मंजिल
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari