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तन्हा तन्हा मत सोचा कर...

पेशानी-ऐ-हयात में कुछ ऐसे बल पड़े, हंसने को जी जो चाहा तो आंसू निकल पड़े, रहने दो ना बुझाओ मेरे आशियाँ की आग, इस कशमकश में आपका दामन ना जल पड़े।" इन्ही शेर के साथ ग़ज़ल आरम्भ होती और सलीम के चेहरे पर मोनालीसा मुस्कान उतर आती मैं उसके चहरे पर कई भाव देखता
 
Kishore Choudhary
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इस दिवाली क्या खरीदें?

बड़ी असमंजस की स्तिथि है कि इस डूबते शेयर बाज़ार, डूबती अर्थवयवस्था से डरे-सहमे आम आदमी ख़रीदे तो क्या ख़रीदे। अपने आज के लिए कुछ करें या अपने कल को सवारने कि फ़िर से कोशिश कि जाए? दिवाली में दोस्तों रिश्तेदारों के लिए १०० रुपये की पेप्सी की दो-लीटर वाल
 
निशान्त
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शेयर बाज़ार मेरी नज़र में.......

चौंकिये मत मैं कवि ही हूं बस आज मन है कि इस पर भी अपने मन की बात आप सबसे शेयर कर ली जाय. मैं कोई इस बाज़ार का एक्सपर्ट तो नहीं लेकिन जो मैं इसके बारे मैं जानता और मानता हूं वही आप सबसे साझा करने की कोशिश करता हूं. बहुत सारे लोग सोचते हैं कि अरे अपने शेयर
 
संजीव गौतम