नव वर्ष संवत्सर के प्रथम दिवस की अरुणिम बेला का प्रकाश पुंज पुरे वर्ष आपके जीवन पथ को ज्योतिर्मय, सुख-समृद्धि एवं आरोग्य प्रदान करे यही हमारी कमाना है।
.....होली मुबारक .....हिंदी ब्लॉग जगत एवं ब्लॉग वाणी के सभी चाहने वालों को होली के शुभ-अवसर पर ढेरों शुभ-कामनाएं ....हो सके तो केवल तिलक लगायें.......पानी अमूल्य है इसे यथा -संभव बचाएं ....---- राकेश वर्मा
सबों को होली की शुभकामनाएं। होली आपसी प्रेम व भाईचारा का प्रेम है। अतः यह ख्याल रखें कि इस पर्व में आपसी प्रेम बनाएं रखें तथा किसी के भी साथ जोर-जबरदस्ती नहीं करें। जो न चाहे उसे जबरन रंग-गुलाल न लगायें। किसी के साथ अभद्र व्यवहार न करें तथा होली को प्रेम
अपने गिरिजेश जी तो फगुनाहट में सराबोर हैं, उन्हें बखूबी साथ मिल रहा है अमरेन्द्र भाई का, तथा हिमांशु भाई का। कौन आचारज है, कौन चेला, कुछ भी क्लियराय नहीं रहा। जो भी हो, यह मंडली लगभग हर दूसरे ब्लॉग पर जोगीरा सरररर करते दिख जा रही है। ब्लॉग जगत का आपसी
इस बार न तो कोयल कूकी, न बयार बही, न आम बौराया और न ही पलाश दहका....बहुत दबे पाँव बसंत आया...दिन-रात की तीखी खुनक के बीच दोपहर थोड़ी बहुत मुलायम हो रही है। आहट सुनाई पड़ रही है...वह अभी आया तो नहीं ही है, बस कहीं किसी पलाश पर बसंत की छाया दिखती है, बाकी
अंकुर ने ग्रीटिंग कार्ड भेजा है। सचमुच का, कागज़ का!ई-कार्ड नहीं है, कहीं क्लिक करने पर संगीत नहीं बजता, सीनरी बदलती नहीं, अन्दर का सन्देश भी वैसे का वैसे ही रहता है। लेकिन पेज बंद करते ही गायब नहीं हो जाता, पास रहता है, छू सकता हूँ उसे।छूता हूँ भी! बार
नए साल का पहला दिन। सभी कबाड़ियों को और 'कबाड़ख़ाना' के सभी पाठकों और प्रेमियों को नया साल मुबारक होवे ! आइए सुनते हैं आबिदा परवीन के स्वर में 'किरपा करो महाराज' ! और कोशिश करें कि हमारे बाहर - भीतर का संसार कबाड़ होने से बचा रहे ! बस्स , यही शुभकामना !
ॐ आदिदेव नमस्तुभयँ प्रसीद मम भास्कर । दिवाकर नमस्तुभ्यँ प्रभाकर नमोस्तुते ॥ पुजी ले चरण तोहार ऐ छठी मइया , दुखवा से करदअ उबार ऐ छठी मइया... सुर्य उपासना के महान पर्व छठ के अवसर पर हार्दिक मंगलमय शुभकामना छठ पर्व का एक भक्तीमय लोकगीत : नरियवा जे फरेला
साढ़े तीन साल होने को आये मुझे बरेली में। एक ऐतिहासिक महत्व का शहर और कमिश्नरी होने के बावजूद इस शहर में एक बहुत बड़ी कमी है- सिनेमाहालों की। कुल जमा आठ-दस में से आधा दर्जन हॉल में या तो ‘जीने नहीं दूँगा’ और ‘चांडाल’ टाइप फिल्में लगी रहती हैं, या तो
बंधुवर/भगिनी सप्रेम नमस्कार। दीपावली सनातन संस्कृति की महान् परम्पराओं में सबसे अग्रणी है। इस पावन पर्व पर आपको स्नेहिल शुभकामनाएँ। दीपों का यह पर्व सफलता, उन्नति, यश, कीर्ति, सुख-शान्ति, समृद्धि और विकास लेकर आपके जीवन को और अधिक दीप्तिमय करे। स्वयं
न्यूज़ रूम की आख़िरी क़तार में कुर्सी नीचे कर बैठना, और ये सोचना कि कोई देखे ना। की-बोर्ड पर तेज़-तेज़ उंगलियां चलाना, कुछ वक़्त खुद के लिए चुराना... किसी की, किसी के लिए या फिर किसी का नहीं... बल्कि लंबे समय से अपने दिमाग़ में चल रही बातों को ये सोच कर
साल में दो बार जब भी देश के स्वतंत्र और गणतंत्र दिवस को मनाये जाने का अवसर आता है उस समय हमेशा ही ये प्रश्न उठता और उठाया जाता है की ...क्या यही है आजादी...क्या इसी के लिए हमारे पुरखों ने संघर्ष किया था ..क्या यही वो सपना था जो उन्होंने देखा था....और
सबों को होली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ। होली का पवित्र पर्व नजदीक है। मैं व्यक्तिगत रूप से सबों से आग्रह करना चाहता हूँ कि होली के पवित्र पर्व को पवित्र बनाएं रखें व इसे दूषित नहीं करें। कितने लोग इस होली के पर्व के ही दिन पुराने शत्रुता का बदला लेते है