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सूरज बन मुस्काऊँ : अक्षिता पाखी के चित्रों के साथ रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत

सूरज बन मुस्काऊँमैंने चित्र बनाए सुंदर,आओ, तुम्हें दिखाऊँ!इन्हें बनाकर ख़ुश होता है,मेरा मन, मैं गाऊँ!तोता लटका है बादल से,देखे सूरज नीला!खरबूजा भी लुढ़क रहा है,आसमान में पीला!चूहा, हाथी, फूल हँस रहे,मैं भी सबको भाऊँ!मैंने चित्र बनाए ... ... .गुड्डा मेरा
 
रावेंद्रकुमार रवि
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मैं चाहूँ ख़ूब खेलना : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत

मैं चाहूँ ख़ूब खेलना मैं गाऊँ एक तराना, ख़ुशियों की बात बताना! मैं चाहूँ हर पल हँसना, फूलों की तरह महकना! फूलों से बातें करती, तितली के जैसे उड़ना! मेरा मन है नन्हा-सा, इसको मत कभी दुखाना! मैं गाऊँ ... ... . मैं चाहूँ ख़ूब खेलना, चिड़िया की तरह
 
रावेंद्रकुमार रवि
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टर्र-टर्रकर मेढक गाए : सलोनी राजपूत का नया शिशुगीत

टर्र-टर्रकर मेढक गाए! ----------------------------------------------------- कूद-कूदकर गीत सुनाए, टर्र-टर्रकर मेढक गाए! जहाँ देखता कोई कीड़ा, झट-पट अपनी जीभ बढ़ाए! टर्र-टर्रकर मेढक गाए! छप-छप करके नाच दिखाता, तैर-तैर के गोते खाए! टर्र-टर्रकर मेढक गाए!
 
रावेंद्रकुमार रवि
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हम भी उड़ते : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत

हम भी उड़तेहम भी उड़ते आसमान में जैसे उड़े पतंग! सजाकर सुंदर-सुंदर रंग! देख-देख जिनकी उड़ान हम रह जाते हैं दंग, वे चिड़ियाएँ उड़ें मज़े से मस्त हवा के संग! सजाकर ... ... . उड़ती हैं तितलियाँ बाग़ में भर पंखों में रंग, रुक-रुक जो कहतीं फूलों से -"चलो
 
रावेंद्रकुमार रवि
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मेरा मन मुस्काया : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत

मेरा मन मुस्काया------------खिल-खिल करके, खिल-खिल करके,मेरा मन मुस्काया!मेरी चिड़िया ने जब मुझको,मीठा गीत सुनाया -खिल-खिल करके, खिल-खिल करके,मेरा मन मुस्काया!मेरे पिल्ले ने जब बढ़कर,मुझसे हाथ मिलाया -खिल-खिल करके, खिल-खिल करके,मेरा मन मुस्काया!मेरे तोते
 
रावेंद्रकुमार रवि
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बोलो, मेरी गुड़िया रानी : संगीता स्वरूप का नया शिशुगीत

बोलो, मेरी गुड़िया रानी! क्यों करती हो तुम मनमानी?बोलो, मेरी गुड़िया रानी!बिस्किट, टॉफी, केक, मिठाई,बोलो, क्या तुमको मन-भाई?चीज़ कौन-सी तुमको खानी?बोलो, मेरी गुड़िया रानी!शरबत, कोकाकोला लाऊँ,या फिर जलजीरा बनवाऊँ?लोगी, क्या तुम नींबू-पानी?बोलो, मेरी
 
रावेंद्रकुमार रवि
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मन ललचाती : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत

मन ललचातीआइसक्रीम, आइसक्रीम सबने मिलकर खाई!बंद पड़ी थी जो सर्दी में फ़्रिज के अंदर रूठी,भाप उड़ाती, मन ललचाती आज निकलकर आई!आइसक्रीम, आइसक्रीम सबने मिलकर खाई!कोई खाता स्वीट मैंगो,कोई चखे वनीला,चॉकलेट के फ्लेवरवाली सबके मन को भाई!आइसक्रीम, आइसक्रीम सबने
 
रावेंद्रकुमार रवि
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पाखी के लिए जन्म-दिवस का उपहार : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत

पाखी के लिए जन्म-दिवस का उपहारआज मैं अचानक पाखी की दुनिया में पहुँच गया! पाखी ने कहा - "देखो मेरी गुड़िया"फिर बोली - "इसको भी एक गीत सुनाना!"मैंने वहाँ बैठी गौरइया को देखकर एक गीत रचा और सुनाने लगा -गौरइया जब आती है, मीठा गीत सुनाती है! गौरइया जब आती है,
 
रावेंद्रकुमार रवि
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क्या मुझसे डर जाती हो : चंदन कुमार झा का पहला शिशुगीत

क्या मुझसे डर जाती हो? चिड़िया रानी, चिड़िया रानी, मुझे सुनाओ अपनी बानी! जब मैं तुमको पास बुलाता, दूर चली क्यों जाती हो? मैं तो हूँ छोटा-सा बच्चा, क्या मुझसे डर जाती हो? आओ, तुम्हें पिला दूँ पानी!चिड़िया रानी, चिड़िया रानी, मुझे सुनाओ अपनी बानी! बिना थके
 
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ख़ूब रसीला : संगीता स्वरूप का एक शिशुगीत

------------------------------ख़ूब रसीला------------------------------------------------------------गोल-गोल है लाल टमाटर,सबके मन को है भाता ।स्वाद बढाता है सब्जी का,जब उसमें डाला जाता ।खट्टा -मीठा , ख़ूब रसीला,मन होता खाते जाएँ ।रंगत लाल टमाटर-जैसी,अपने
 
रावेंद्रकुमार रवि
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सेब निराला : संगीता स्वरूप का एक शिशुगीत

सेब निरालालाल-लाल है सेब निराला,ख़ुश होता हर खानेवाला ।प्रतिदिन इसको जो है खाता,वह रोगों को दूर भगाता । संगीता स्वरूप
 
रावेंद्रकुमार रवि
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रावेंद्रकुमार रवि का एक शिशुगीत : मीठा-मीठा-मीठा

मीठा-मीठा-मीठा----बकरी का बच्चा, बच्चे की मम्मी, मम्मी का दुद्-धू, मीठा-मीठा-मीठा, बच्चा दुम उठा के पीता!--रावेंद्रकुमार रवि
 
रावेंद्रकुमार रवि