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मुन्नी की गुड़िया

रतन चन्द रत्नेश मेले से लेकर आयी मुन्नी एक गुड़िया। रात होते ही जो बन जाती थी बुढ़िया। हमने पूछा मुन्नी से बुढ़िया कैसे बनती गुड़िया। कहने लगी खिलाती इसको मैं जादू की पुड़िया। ******
 
किरण गुप्ता
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पांच होली गीत

गिरीश पंकज (1)कितनी प्यारी होली है।मीठी -मीठी बोली है।तरह-तरह के रंग मिले,भर गई अपनी झोली है।। (2)कोई मेरे पास तो आओ।अरे मुझे भी रंग लगाओ।छोटा बच्चा समझ लिया है?मुझको ऐसे मत बहलाओ।।(3)डैडी इक पिचकारी लाओ,मम्मी जी पर डालो रंग।ये करना है, वो करना है,कर
 
किरण गुप्ता
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रामेश्वर काम्बोज हिमांशु के दो शिशु-गीत

मालीसींच-सींचकर हर पौधे कोहरा-भरा करता है माली।रंग-बिरंगे फूलों से नितबगिया को भरता है माली।हर पौधे से और पेड़ सेबगिया में होती हरियाली। *****तोतासीटी सुनकर नाच दिखाएकुतर-कुतर कर फल खा जाए।टें-टें करके गाता तोतादेख शिकारी झट उड़ जाए। *****
 
किरण गुप्ता
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चूहे हुए सयाने

भूख लगी बिल्ली मौसी कोतो वह पूरे गाँव में डोली।चूहा पास में एक न आयाचाहे कितना भी मीठा बोली।सभी कोशिशें हुईं फेल तोनया दाव अपनाया।चूहों को धोखा देने खातिरअपने को खूब छिपाया। *****
 
किरण गुप्ता
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रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ के दो शिशु गीत

1.मोरआसमान में उड़ते बादलउमड़-घुमड़ जब करते शोर।रंग-बिरंगे पंख खोलकरखूब नाचता है तब मोर। **** 2. मुर्गा बोलामुर्गा बोला कुकुड़ू कूँजाग उठा मैं, सोता तू।सूरज भी अब जाग गयादूर अँधेरा भाग गया।बिस्तर छोड़ो उठ जाओ मुँह धोकर बाहर आओ। ****
 
किरण गुप्ता