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एक ट्रेन का सफर..कुछ खास यादें...शिखा और दिव्या...

ये  कोई कहानी नहीं, बल्कि मेरे कुछ अनमोल पलों में से एक हैं, अभी बस लिखने को दिल चाहा तो लिख दिया, ये कोई कहानी या रचना नहीं, इसलिए ये नहीं कह सकता की कितनो को अच्छा लगे ये पढ़ना और कितनो को बोर करेगी..लेकिन ये मेरे दिल के बहुत ही करीब है और कुछ एक
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सिर्फ एक सवाल का जवाब आज मांगता हूँ...: महफूज़

कहाँ खो गयीं थीं तुम?जवाब दो....मत पूछो हाल मेरा,पर मेरे हर आंसू  का हिसाब दो.बुना था जो ख़्वाब तुम्हारे साथ,उसे धड़कन बना कर पास रखा था,तस्वीर जो बनाई थी तुम्हारी,उसे आँखों में बसा कर रखा था.सिर्फ एक सवाल का जवाब आज मांगता
 
महफूज़ अली
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