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शिक्षा और आत्मविकास

कथा कहानियों से मेरा लगाव संभवतः जन्मगत ही था ,जो स्वतः ही मुझे इसके विभिन्न श्रोतों से सदैव ही जोड़ता रहा..कथा संसार में तन्मयता से विचरण कर नित नवीन अनुभव प्राप्त करना और उसे जीवन सन्दर्भ में देखना गुनना मुझे अतिशय प्रिय था. बचपन में नयी कक्षा में जाने
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संघी होना पाप तो नहीं

अभी कुछ दिन पहले भड़ास पर माखनलाल के 'संघी कुलपति' की पोल खुली खबर पढ़ी. आरोप है कि विश्वविद्यालय की भर्ती परीक्षा में संघ से जुड़े सवाल पूछे गए. आरोप लगाने वाले हैं कांग्रेसी. मेरा पूछना केवल इतना है कि क्या संघी होना पाप है. प्रत्येक व्यक्ति किसी न
 
Sachin Rathore
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महामानवों के निर्माण व सामाजिक श्रेष्ठता संवर्धन में नारी का योगदान ---डा श्याम गुप्त का आलेख

महामानवों के निर्माण व सामाजिक श्रेष्ठता संवर्धन में नारी का योगदान ( डा श्याम गुप्त ) यदि मानव प्रकृति की संरचनात्मक कृति की सबसे उत्कृष्ट, समृद्ध व आधुनिकतम रूप है तो नारी प्रकृति की सृजनात्मक शक्ति का सर्वश्रेष्ठ व उच्चतम रूप है। इस संसार रूपी ईश्वरीय
 
Dr. shyam gupta
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शिक्षा संस्थानों के फर्जीवाड़े

Navbharat Times - Breaking news, views. reviews, cricket from across India   फर्जी संस्थानों का फेर29 May 2010, 2359 hrs IST,नवभारत टाइम्स  12वीं का रिजल्ट आने के बाद ग्रैजुएशन कोर्सों में दाखिले के लिए स्टूडेंट्स और पैरंट्स
 
डॉ महेश सिन्हा
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पश्चाताप :मानस खत्री

एक लड़की थी. उसका नाम था डिंकी. वो अपने माता-पिता की एकलौती संतान थी. दोनों ही उससे बहुत प्यार करते थे. डिंकी पढने के साथ-साथ विद्यालय की सारी गतिविधियों में सबसे आगे रहती थी. परन्तु उसमें एक कमी थी. वो घर में कोइ काम नहीं करती थी. जब भी उसकी माँ उससे
 
Manas Khatri
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जंगल से कटकर सूख गये मालधारी

शिरीष खरेपोरबंदर/ एशियाई शेरों के सुरक्षित घर कहे जाने वाले गिर अभयारण्य में बरसों पहले मालधारियों का भी घर था. ‘माल’ यानी संपति यानी पशुधन और ‘धारी’ का मतलब ‘संभालने वाले’. इस तरह पशुओं को संभाल कर, पाल कर मालधारी अपनी आजीविका चलाते थे. एक दिन पता चला
 
CRY के दोस्त
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श्रम से चलता है ये जीवन :मानस खत्री की कविता

आपदाओं से मत घबराओ, सदा इन्हें स्वीकार करो, जीवन में कुछ करना है तो, मेहनत से तुम काम करो. पत्थर पिघल जाएंगे पल में, मिटटी बन जाएगी सोना, श्रम से चलता है ये जीवन कुछ पाने को है, कुछ खोना
 
Manas Khatri
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अब इस फतवे से जगी आस

भारत में 90 फीसदी मुस्लिम छात्र दसवीं तक पहुंचने से पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं। शहरों में सिर्फ 1 फीसदी महिलाएं और 3.4 फीसदी मर्द स्नातक हैं। गांवों में मात्र 0.7 फीसदी पुरुष स्नातक हैं और महिलाएं ना के बराबर हैं। आए दिन कोई ना कोई फतवा। कभी इस बात पर
 
Nitish Raj
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राजनीतिक हस्तक्षेप से निरंकुश होती पत्राकारिता से विनाश का खतरा बढ़ा

आज पत्रकार यह भूलता जा रहा है कि पत्रकार का सम्मान तो उसके द्वारा किये जाने वाले त्याग व तपस्या के कारण होता है। आदर्श पत्रकारिता तो पत्रकारों के द्वारा उठाये गये जोखिम, आदर्श, उददे्श्यों में ही पनपती है। गणेश शंकर विद्यार्थी तथा बाल गंगाधर तिलक इत्यादि
 
NEWS SOURCE
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राजनीतिक हस्तक्षेप से निरंकुश होती पत्राकारिता से विनाश का खतरा बढ़ा

आज पत्रकार यह भूलता जा रहा है कि पत्रकार का सम्मान तो उसके द्वारा किये जाने वाले त्याग व तपस्या के कारण होता है। आदर्श पत्रकारिता तो पत्रकारों के द्वारा उठाये गये जोखिम, आदर्श, उददे्श्यों में ही पनपती है। गणेश शंकर विद्यार्थी तथा बाल गंगाधर तिलक इत्यादि
 
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आधी लड़कियों के लिए राइट विदाउट एजुकेशन

शिरीष खरेभारत में 6 से 14 साल तक के बच्चों के लिए ‘राईट टू एजुकेशन’ है, मगर 6 से 14 साल की कुल लड़कियों में से 50 प्रतिशत लड़कियां तो स्कूल से ड्राप-आऊट हो जाती हैं। यह आकड़ा मौटे तौर पर दो सवाल पैदा करता है, अव्वल तो यह कि इस आयुवर्ग की आधी लड़कियां स्कूल
 
CRY के दोस्त
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ये कहाँ आ गए हम सरलता की तलाश में...

अभी कुछ दिन पहले रावण द्वारा लिखा गया "शिव तांडव स्त्रोत्र" सुनने और पढ़ने का अवसर मिला. सुनने में बेहद ही सुन्दर और कर्णप्रिय लगा.  रावण ने एक बार कैलाश पर्वत को उठा लिया था, तब शिव ने अपने पाँव से कैलाश का भार इतना बढा दिया कि रावण का हाथ
 
Sachin Rathore
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अंधेरे में उजले अक्षरों की तलाश

नजारा-एकछोटू जरा चाय लाना!आज श्रमिक दिवस है। चाय की एक थड़ी पर जमा चार लोग अखबार में छपी एक कृशकाय बच्चे की तस्वीर पर चर्चा कर रहे हैं। यह बच्चा बाल श्रमिक है, जो जवाहरात के नाजुक लेकिन खतरनाक काम को अपनी नन्ही अंगुलियों से बखूबी अंजाम दे रहा है। चारों
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ये शिक्षा का बाज़ार है!

धरने के दौरान एक पोस्टरगोरखपुर: उच्च शिक्षा की खस्ताहाल स्थितिउच्च शिक्षा किसी भी सभ्य समाज के लिए एक जरूरी शर्त होती है। साहित्य संस्कृति, कला और राजनीति के विभिन्न पक्षों पर गंभीर चिन्तन का काम उच्च शिक्षित व्यक्ति ही कर सकता है। लेकिन आज पूरे देश के
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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देशी विश्वविद्यालयों की कब्र पर विदेशी विश्वविद्यालयों की ईमारत

विदेशी नहीं, देशी विश्वविद्यालयों से ज्ञान महाशक्ति बनने का ख्वाब होगा पूरा पता नही, मनमोहन सिंह सरकार के कैबिनेट मंत्रियों ने विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर खोलने की इजाजत देनेवाले विधेयक को मंजूरी देते समय बी.बी.सी की वह खबर पढ़ी थी या
 
आनंद प्रधान
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सुभागलाल का सपना सच हो गया

शिरीष खरेवैसे तो देश के असंख्य सुभागलालों का सपना सच नहीं होता है। मगर घोरवाल के सुभागलाल का सपना सच हो गया। उसके गांव के सारे बच्चे अब स्कूल जाते हैं। जब वह छोटा था तब ऐसा कतई नहीं था।ग्राम घोरवाल, उत्तरप्रदेश के सोनभद्र जिले में हैं, जहां बेहतरीन
 
CRY के दोस्त
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शिक्षा…

परवाच भरत नावाचा एक मित्र भेटला होता.दिड -दोन वर्षे वापी इथे सनफ़ार्मामध्ये काम केल्यानंतर दोन महिन्यापुर्वीच त्याने मुबंइ मधील सिपला हया फ़ार्मा क्षेत्रातील अग्रगण्य कंपनीत अगदि भरभक्कम पॅकेजसह प्रवेश केला होता.त्यासंदर्भात त्याच्याशी बोलणी चालु असतांना
 
देवेंद्र चुरी
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एजुकेसन

गाँव में शिक्षा के नाम पर तमाशा जारी हे शहरों में एजुकेसन के नाम परगोरख धन्दाभारी हे दीवारों पर लीखनेसेकुछ नहीं होगा कुत्ता टांग उठा के धो देगा या फिर पढ़े लिखे लोकतंत्र में शिक्षा अब अधिकार हेपर उजाला फिर चंद लोगों में बटेंगा इस देश में फिर एक भूखा जोकर
 
makrand
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भारतीय मैकाले अपनी शिक्षा व्यवस्था से चपरासी भी नहीं बनने देंगे

उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालयीन, महाविद्यालयीन परीक्षाओं का संचालन हो रहा है। कॉलेज में होने के कारण परीक्षाओं के समय ड्यूटी पर जाना होता है। अध्यापन के समय से परीक्षाओं का समय एकदम अलग सा होता है। तीन घंटे के दौरान विद्यार्थियों के मनोभावों से परिचित
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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बिना तैयारी के आया कानून

राजनीतिक दल और सरकारें महज लोकप्रियता हासिल करनेऔर लूट -खसोट की सुविधाएं बनाए रखने के लिए हर तरह का पैंतरा अपनाती रही हैं। मुझेलगता है कि ‘अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा कानून’ इसी कड़ी को आगे बढ़ाने का एक हथकंडामात्र है। वाहवाही हासिल करने के लिए अनिवार्य और
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लार्ड मैकाले और उनका गाउन

मौका भोपाल के भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के सातवें दीक्षांत समारोह का। बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश। और यह क्या मंत्री जी ने दीक्षांत समारोह में पहना जाने वाला गाउन यह कहते हुए उतार कर फेंक दिया कि आजादी के साठ साल बाद भी मैं यह
 
pankaj mishra
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कितने अधिकार से पूर्ण होगा शिक्षा का अधिकार....

देश के सभी बच्चे अब आपको कुछ सालों बाद शिक्षा लेते दिखाई पड़ेंगे। जी हाँ, ये कोई सपना नहीं, हकीकत में होने वाला है। शिक्षा लेने सम्बन्धी अधिकार बना दिया गया है और इसके अनुसार देश में 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का प्रावधान किया गया है।
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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अनिवार्य शिक्षा कानून...

आज से देश में एक नए युग का सूत्रपात होने जा रहा है क्योंकि आज से ही देश में शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने जा रहा है. यह सही है कि देश ने पिछले कुछ वर्षों में निश्चित तौर पर साक्षरता दर बढ़ाने में बहुत प्रगति की है पर जिस स्तर पर इसको लागू किया जाना
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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शिक्षा का उद्देश्य सफल होना है या मनुष्य बनना

  विद्या विनय देती है। यह संस्कृत साहित्य की पुरानी उक्ति है। विनयी होने का क्या अर्थ है ? गुरूदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की स्वप्नसंस्था 'विश्वभारती' में 'डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन' के लिए नाम दिया गया 'विनय भवन'। यहाँ स्नातक स्तर के बाद सभी अनुशासनों
 
sudha singh
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बच्चों के पहले, शिक्षा व्यवस्था के पहले अभिभावकों को सुधारना होगा

आजकल उत्तर प्रदेश में परीक्षा महोत्सव चल रहा है। इंटरमीडिएट, हाईस्कूल के साथ ही साथ विश्वविद्यालय की परीक्षाएँ चालू हैं। यद्यपि इंटरमीडिएट और हाईस्कूल की परीक्षाएँ तो समाप्ति पर हैं और विश्वविद्यालयीन परीक्षाओं की अभी शुरुआत ही हुई है।साल भर पढ़ाई (अब
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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मदरसों की हालत...

लखनऊ में चल रहे मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड में इसके अध्यक्ष मौलाना राबे हसन नदवी ने मदरसों में सरकारी हस्तक्षेप से बिलकुल इंकार कर दिया है. उन्होंने मुस्लिम समाज से गैर मुस्लिम समाज के मन से इस्लाम के बारे में फैली भ्रांतियां दूर करने का आह्वाहन भी किया.
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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पुष्पा के साथ स्कूल जा रहे हैं

शिरीष खरे ``मैं रात को ये सोचके जल्दी सो जाती हूं कि सुबह जल्दी उठूंगी, और एक और दिन स्कूल जाने को मिलेगा।´´- ऐसा कहना है पुष्पा का, 10 साल की पुष्पा उड़ीसा के कुमियापल्ली गांव से है। हम पुष्पा के साथ स्कूल जा रहे हैं और वह बता रही है- ``हमारी मेडम हमें
 
CRY के दोस्त
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अंधेरी गलियों के रौशन सितारे

शिरीष खरेशहरी झोपड़पट्टियों में रहने वाले बच्चों की जिंदगी को बोझिल, बेबस और हताश जानकर अक्सर उनसे मुंह फेर लिया जाता है. मगर एक सूझबूझ भरे प्रयास के चलते उसी दुनिया की कुछ लड़कियां आज न केवल सामाजिक अनदेखियों और तमाम बाधाओं से आगे निकल रही हैं, बल्कि
 
CRY के दोस्त
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कैसी शिक्षा व्यवस्था ?

देश के सभी बोर्डों में बारहवीं का एक ही पाठ्यक्रम(गणित व विज्ञान) लागू किये जाने की बात तय हुई है,अच्छी खबर है। पर यहाँ मुख्य सवाल यह है कि क्या इतने भर से सारे बच्चों के साथ न्याय हो जायेगा ? हर प्रदेश में हर बोर्ड में,हर स्कूल में और हर अभिभावक की
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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बजट-2010 : प्राथमिक शिक्षा पर अपेक्षा से बहुत कम आवंटन

शिरीष खरे बजट-2010 में प्राथमिक शिक्षा पर अपेक्षा से बहुत कम आंवटित हुआ है। अपेक्षा यह की जा रही थी कि इस बार कम से कम 71,000 करोड़ रूपए आंवटित होंगे, मगर प्राथमिक शिक्षा में 26,800 करोड़ रूपए से 31,300 करोड़ रूपए की ही बढ़ोतरी हुई है। चाईल्ड राईटस एण्ड यू
 
CRY के दोस्त
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अंग्रेजों की जमीन पर हिंदी के फूल खिले

-डॉ. अशोक प्रियरंजनहिंदी भाषा और साहित्य से विदेशी भूमि भी आलोकित हो रही है। अंग्रेजी के लिए जाने जाना वाले इंग्लैंड तक में हिंदी के फूल खिल रहे हैं। यूरोप में हिंदी भाषियों की बड़ी संख्या है। भारतवंशी अनेक साहित्यकार विदेशों में हिंदी साहित्य सृजन कर
 
dr. ashok priyaranjan
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सरकार बच्चों की गरीबी दूर करने के लिए निवेश करे

शिरीष खरेमुम्बई। क्राई के मुताबिक सरकार को बच्चों की गरीबी दूर करने के लिर अधिक निवेश करने की जरूरत है। सरकारी तथ्यों के हवाले से 37.2% भारतीय गरीबी रेखा के नीचे हैं, जाहिर है कि देश में गरीबों की तादाद पहले से कहीं तेजी से बढ़ रही है। इससे यह भी जाहिर
 
CRY के दोस्त
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“बरफी-लड्डू के चित्र देखकर, अपने मन को बहलाते हैं” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

 मधुमेह हुआ जबसे हमको,  मिष्ठान नही हम खाते हैं। बरफी-लड्डू के चित्र देखकर, अपने मन को बहलाते हैं।।  आलू, चावल और रसगुल्ले, खाने को मन ललचाता है, हम जीभ फिराकर होठों पर, आँखों को स्वाद चखाते हैं। मधुमेह हुआ जबसे हमको, मिष्ठान नही हम खाते
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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शिक्षा

एक बार एक लड़का स्कूल से शिक्षक का एक पत्र आया, जिसमें लिखा था ‘आप का बेटा मंद बुद्धि है । इसे पढ़ाना व्यर्थ है । अच्छा होगा कि आप इसे स्कूल से हटा लें ।’ मां ने यह पत्र पढ़ा । उसकी आंखों में आंसू आ गए । फिर भी उसने अपने पुत्र के सिर पर हाथ फेरते हुए
 
दिनेश शर्मा
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शिक्षा के अधिकार का छलावा लागू होगा

शिरीष खरेसंसद की हरी झण्डी मिलने के बाद, शिक्षा के अधिकार कानून को सरकार ने 1 अप्रैल से लागू करने के लिए हरी झण्डी दे दी है। क्या इससे देशवासियों की उम्मीदों को भी हरी झण्डी मिल पाएगी।बीते साल, नई सरकार के मानव संसाधन विकास मन्त्री कपिल सिब्बल ने शिक्षा
 
CRY के दोस्त
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४ साल में नर्सरी ......

दिल्ली में बच्चो को नर्सरी में दाखिल किये जाने की आयु ४ वर्ष किये जाने पर सहमति बनती दिखाई दे रही है. मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने इस बात पर हुई बात-चीत को सकारात्मक बताया और साथ ही यह भी कहा की इसके लिए उनके आस कोई अधिकार नहीं हैं पर वे दिल्ली की
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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बच्चों को करेंगे दूर-हो जाएंगे मगरूर

आज पालक प्रतिस्पर्धा के चलते अच्छी पढ़ाई के चक्कर में अपने बच्चों को अपने से दूर दूसरे शहरों में पढऩे के लिए भेज देते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो बच्चे माता-पिता से दूर हो जाते हैं वो मगरूर हो जाते हैं।काफी दिनों से हमारी तबीयत खराब चल रही थी हम सोच रहे
 
राजकुमार ग्वालानी
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बनियान

आदमी बनियान में वो भी फटीकुत्ता नेवी ब्लू स्वेटर में कोहरे में लोकतंत्र रसोई में सन्नाटा पत्रिकाएँ नीला लिबास पहने सरवे जारी हे मनोरजन के नाम पर राजनीति जारी हे वेलेंटाइन के कागा बाँट रहे प्रेम का धागा मोह्हबत में तिजारत जारी हे शिक्षा का स्तर बढ गया हे
 
makrand
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नेतरहाट की तर्ज पर जमुई में विघालय

नामांकन प्रक्रिया शुरू, पहला सत्र इसी साल, डेहरी आ॓न सोन में खोला जाना प्रस्तावित झारखंड के गठन के साथ ही बेहतरीन शिक्षण संस्थान नेतरहाट विघालय बिहार में नहीं रहा। इसकी कमी को दूर करने के लिए बिहार सरकार ने नेतरहाट की तर्ज पर दो विघालय खोलने की योजना
 
दीपक राजा
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पत्थरों की खदानों से लौटा बचपन

कभी बाल मजदूरी करने वाला महेन्द्र अब बच्चों के अधिकारों से जुड़ी कई लड़ाईयों का नायक है। महेन्द्र के कामों से जाहिर होता है कि छोटी सी उम्र में मिला एक छोटा सा मौका भी किसी बच्चे की जिंदगी को किस हद तक बदल सकता है।महेन्द्र रजक, इलाहाबाद जिले के गीन्ज गांव
 
CRY के दोस्त