पसंद करें
3
नापसंद करें

कौन इन्कार कर सकता है...... कि यह आवश्यक है ? पर.....

कौन इन्कार कर सकता है...... कि बच्चों के समूह के साथ काम करते समय एक तरह के विशेष अनुशासन की आवश्यकता सदैव ही पड़ती है। आमतौर परअनुशासन बनाये रखने के नाम पर दण्ड, का बहुतायत से प्रयोग किया जाता है।जिसके कभी -कभी बड़े घातक परिणाम वाली घटनाओं की चर्चा समाज
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
पसंद करें
1
नापसंद करें

एक लोकप्रिय शिक्षक थे श्री राम स्वरुप गोस्वामी

गत दिनों मध्य प्रदेश के दतिया नगर में रहने वाले श्री राम स्वरूप गोस्वामी जी का निधन हो गया । वे स्कूल अध्यापक थे किंतु जिस समय ट्यूटोरियल क्लासेस का चलन प्रार्म्भ भी नहीं हुआ था तब वे पी एम टी, पी ई टी आदि कम्पटीटिव एक्जामिनेशन की पात्रता कक्षाओं के
 
वीरेन्द्र जैन
पसंद करें
3
नापसंद करें

खामोश और पनीली आँखों की अनसुनी पुकार

फिल्म 'परदेस' का एक डायलॉग मुझे बहुत पसंद है,जिसमे महिमा चौधरी कहती हैं,"अपने देश में, हम कभी किसी को अकेला नहीं छोड़ते.अगर वो नाराज़ या उदास होकर खुद को कमरे में बंद कर लेता है तो हम कमरे का दरवाजा तोड़ कर अन्दर उसके पास चले जाते हैं."पर क्या सचमुच हम ऐसा
 
rashmi ravija
पसंद करें
1
नापसंद करें

फतेहपुर :जिले भर के परिषदीय स्कूलों के सेवानिवृत्त हुए सवा दो सौ शिक्षकों का किया गया सम्मान

गुरु देवो भव: की भावना पर डा.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर गुरुओं के प्रति असीम श्रद्घा के साथ शिक्षक दिवस मनाया गया। प्राथमिक शिक्षक संघ भिटौरा इकाई के तत्वावधान में जिले भर के परिषदीय स्कूलों के सेवानिवृत्त हुए सवा दो सौ शिक्षकों का सम्मान किय
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
पसंद करें
5
नापसंद करें

क्या सरकार उठा पायेगी इतना भार ?

गौरतलब है! कि बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की चुनौतियों से निपटने के लिए सूबे में तात्कालिक तौर पर 7000 नये स्कूलों और 90,000 अतिरिक्त क्लासरूम की जरूरत होगी। मौजूदा एक लाख स्कूलों को चहारदीवारी से घेरने की जरूरत
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
पसंद करें
5
नापसंद करें

बिन गुरु ज्ञान कहाँ से लाऊं?

शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल सुधार के कार्यक्रम में योग्य एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की कमी चिंता का विषय है। लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षक अभी भी हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं। निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के सपनेका सबसे बड़ा व्यवधान यह ह
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
पसंद करें
0
नापसंद करें

आत्मप्रचार का प्रयास-आलेख (atma prachar ka prayas-hindi lekh)

अगर सभी लोग जीवन सहज भाव से व्यतीत करें तो शायद उनके बीच कोई विवाद ही न हो। मगर यह संभव नहीं है क्योंकि अधिकतर लोग बाह्यमुखी होते हैं और उनमें कुछ ऐसे होते हैं जो अपने व्यवसाय के हित के लिये शोर शराबा करते हुए लोगों का ध्यान अपनी ओर बनाये रखते हैं। आ
 
दीपक भारतदीप
पसंद करें
2
नापसंद करें

यूपी के शि‍क्षक महायोद्धा रामपाल सिंह नहीं रहे

रामपाल जी यूपी के शि‍क्षा आंदोलन के सैलीबरेटी थे।  यूपी की माध्‍यमि‍क शि‍क्षा को बनाने में उनकी बड़ी भूमि‍का थी। वे चालीस सालों तक नजीबावाद(बि‍जनौर) के दो कॉलेजों में प्रि‍सिंपि‍ल रहे। संभवत: चंद शिक्षकों को ही इतने लंबे समय तक प्रधानाचार्य पद औ
 
jagadishwar chaturvedi
पसंद करें
0
नापसंद करें

शिक्षा की खलनायिका : दो और टिप्‍पणियां

इस लेख का आशय यह कतई नहीं है कि शिक्षक समुदाय को नीचा दिखाया जाए। उद्देश्‍य केवल यह है कि हम सब इस बात के प्रति संवेदनशील रहे हैं कि शिक्षा प्राप्‍त करने वाले बच्‍चों के कोमल मन पर कौन सी बातें चोट पहुंचाती हैं। विडम्‍बना यह है कि ये चोट जीवन भर सालती
 
राजेश उत्‍साही
पसंद करें
0
नापसंद करें

गुरु का स्वाभाविक स्वरूप

शिक्षक सब जगह होते हैं पर भारत के शिक्षक मात्र शिक्षक नहीं गुरु होते हैं। गुरु एक ऐसा भारी शब्द है कि अंग्रेज़ इसका अर्थ अपनी भाषा के किसी शब्द के आवरण में उठा के नहीं ले जा सके - गुरु का एक अन्य अर्थ भारी होता ही है – समूचे शब्द को ज्यों का त्यों स्वीकार
 
अभय तिवारी
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्रार्थना.

शिक्षक : राजू तु जेवण्यापूर्वी प्रार्थना करतोस का ?राजू : नाही सर, तशी गरज नसते. माझी आई फार चांगला स्वयंपाक करते.
पसंद करें
0
नापसंद करें

परंपरा.

शिक्षक : शाम, तु वर्गात फार बोलतोस.शाम : ती आमची परंपरा आहे.शिक्षक : याचा अर्थ काय आहे ?शाम : माझे आजोबा रस्त्यावर फेरीवाले होते, आणि वडिल शिक्षक.शिक्षक : आणि आई काय करते ?शाम : ती एक स्त्री आहे.