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तुम हमारे बच्चो को ओर हमे मारो हम तुम्हारे बच्चो को ओर तुम्हे मारेगे....

कई दिनो से दिमाग मै कुछ आ ही नही रहा लिखने के लिये, बहुत सोचा लेकिन लगता था दिमाग दवाईयां खा खा खा कर बेकार हो गया.... तभी आज बाबा लंगोटान्नद जी दोपहर को मेरे आफ़िस मै पधारे, बोले बच्चा क्यो नही लिखते... चलो आज कुछ भी लिखॊ लेकिन लिखो जरुर....तभी मुझे
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हैंड पर धर देता हूं हैंडफ्री

पिछली चिट्ठी हैंड पर धर दिया था हैंडफ्री में मैंनें कहा था - "कुछ लोग तो आवाज कम करने की बात कहने पर झगडने लगते हैं। आप बतायें ऐसे लोगों का क्या किया जा सकता है?????"इस बारे में आप सबका अमूल्य विचार और सलाह देने के लिये हार्दिक धन्यवाद। आप सभी मित्रों के
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मरीचिका

रेलगाड़ी अभी नहीं आयी थी । उमस बढती जा रही थी । गरमी में पसीने की चिपचिपाहट से सबके बदन भीग गए थे । कितने ही होंठ पपडाए हुए थे । लोहे की जाली वाली खिड़की के ऊपर तीन भाषाओँ में लिखा था-- 'शीतल जल' । खिड़की के सामने लोगों को पंक्तिबद्ध रखने के लिए मज़बू
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टांग जो खिंचे उसे भगाओ

ब्लांग जगत मै मेने कई ऎसे ब्लांगर देखे है जो खाम्खा मै दुसरो से पंगा लेते है, बिन बात दुसरे के बारे सही बात भी गलत बात सिद्ध करना चाहते है, अगर कोई टिपण्णी थोडी आलोचक ढंग से दे देते, टिपण्णी देने वाले या लेने वाले को तो कोई दिक्कत नही होती लेकिन किसी