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शहनाई खामोश नहीं हुई है दोस्त (सपने में बिस्मिल्ला खान से बातचीत)

सपने में बिस्मिल्ला खान से बातचीतखां साब बेहद सुस्त नजर आ रहे थे। बनारस में अपने घर के बरामदे पर चुपचाप बैठे सामने की ओर देख रहे थे। उनके समीप बैठकर मैं भी चुपचाप उन्हें देखे जा रहा था। उनकी खामोशी टूटी, और कहा, जनाब, एक बात जानते हो, जिदंगी कुछ
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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यहां सिर्फ मरने के बाद ही सम्मान किया जाता है- उस्ताद अकील अहमद खान

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के आगरा घराने से ताल्लुक रखने वाले उस्ताद अकील अहमद खान इन दिनों बीमार हैं लेकिन वह बिल्कुल अकेले हैं। सरकार की उपेक्षा से बेजार इस संगीत दिग्गज का कहना है कि यहां सिर्फ मरने के बाद ही सम्मान किया जाता है। खान साहेब आगरा घराने
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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उस्ताद राशिद ख़ाँ ; आओगे जब तुम साजना

भारतीय चित्रपट संगीत हमेशा से रचनाधर्मी रहा है। थोड़ा पीछे जाएँ तो याद आता है कि उस्ताद अमीर ख़ॉं , उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ॉं, पं. डी.वी. पलुस्कर, बेग़म अख़्तर, पं. भीमसेन जोशी, विदूषी निर्मला अरुण, विदूषी किशोरी अमोणकर, लक्ष्मी शंकर, आरती अंकलीकर, पं. अज
 
संजय पटेल...
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बाहुबलियों की नहीं संगीत और साहित्य की भूमि है पूर्णिया

समय की तेज रफ्तार में बिहार के पूर्णिया जिले की तस्वीर भी बदलती जा रही है। महान उपन्यासकार फणीश्वरनाथ रेणु की भूमि के लिए प्रसिद्ध पूर्णिया को लोग पप्पू यादव और न जाने कैसे-कैसे बाहुबलियों के लिए भी याद करते हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कि रेणु की प्
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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जसराज के साथ होली के खिलैया....अपने अंकुर के लिए

यह पोस्ट पंडित जसराज के करोड़ों दीवानों में एक ७ साल के अंकुर के लिए है। जिसके लिए जसराज केवल जसराज नहीं हैं, एक डिवाइन टच भी हैं। आपने यहां पहले भी अंकुर के बारे में पढ़ा है। आज उसके गुरु बाबा (पंडित जसराज) को होली के रंग में पढिए और रंग में डूब जाइ
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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शास्त्रीय संगीत और अंकुर

संगीत की तरफ रूझान हमेशा रहा लेकिन दुख हमेशा रहेगा कि शास्त्रीय संगीत के व्याकरण को कभी समझ नहीं सका, लेकिन जब कभी भी मौका मिलता है तो शास्त्रीय संगीत कार्यक्रमों में जरूर पहुंचता हूं। पंडित जसराज को सुनकर एक अजीब ही सुख मिलता है। रेणु के शब्दों में
 
गिरीन्द्र नाथ झा