शर्म
(तभी वह चाहता है कि सभी बेशर्म हो जाएँ तो उसे शर्म करने की आवश्यकता न हो । और यह खेल अनवरत रूप से चल रहा है । चाहे आज किसी भी क्षेत्र में देख लें )। भारतीय संस्कृति-सभ्यता-समाज और व्यक्तिगत आचरण में शर्म का बहुत ही महत्त्व है। अब तो यह कहना चाहिए कि ;
May 25 2010 05:23 PM



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