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मानव भाव अभिव्यक्ति

मनुष्यता की दो पहचानें मानवता को पशुता से प्रथक करती हैं - समाजीकरण एवं भाषा विकास. समाजीकरण का मूल मन्त्र कार्य विभाजन के साथ परस्पर सहयोग है, जबकि भाषा विकास का मूल भाव और शब्द का सम्बन्ध है. इन्ही दो माध्यमों से मानव समाज से महामानावोदय की संभावना है.
 
देवसूफी राम कु० बंसल