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भगवान भरोसे

आप कभी किसी मकान की ऊंची छत से अगर सड़क का दृश्य देखें तो लगेगा सड़क पर जैसे कीड़े-मकौड़े की तरह वाहन दौड़ रहे हैं। हर किसी को बहुत जल्दी है पता नहीं कहां पहुचने की। असहाय खड़ी यातायात पुलिस अब ऐसे दृश्योंं को देखने की आदी हो चुकी है। लगता है कि जैसे
 
सड़क मित्र
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क्रांति अब कभी नहीं होगी

इंकलाब या क्रांति. एक ऐसा संघर्ष जिसका समापन व्यवस्था के पलटने से हो. बूढ़ी हो चुकी व्यवस्था क्रांति का शिकार होकर अचानक ढेर हो जाये और उसकी जगह आये एक नया विचार जिसे फिर अपनी कसौटी पर परखें लोग. पर लगता है कि आखिरी क्रांति बहुत पहले गुजर चुकि और जो
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सुरक्षा व्यवस्था

अमेरिकन सनदी अधिकाऱ्यांनी बहुतेक माझा ब्लॉग भाषांतर करून वाचला बघा. नायजेरियन दहशतवाद्याला तपासण्यात आलेले अपयश हा व्यवस्थेचा दोष असल्याचे जाहीर करून टाकले आहे. आता प्रश्न असा आहे कि व्यवस्था सुधारण्यासाठी गेली ८ वर्षे झालेले प्रयत्न फोल ठरले आहेत हे
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हिंदोस्तां का मजहब क्यों बन गया क्रिकेट

क्रिकेट हमारे देश का सबसे बड़ा खेल बन गया है, यह बात अक्सर कही और सुनी जाती है, लेकिन कब और कैसे, इसके बारे में शायद ही कभी जिक्र होता है। दरअसल, यह सभी जानते हैं कि क्रिकेट मूलत: हमारे देश का खेल नहीं है, बावजूद इसके इसने बाकी सभी खेलों को काफी पीछे
 
प्रसून जोशी