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उफ्फ़ !!! कितनी गर्मी है....................

.उफ्फ़ !!! कितनी गर्मी है ..........सोच रही थी मै कार की खिड़की से बाहर देखते हुए .........छोटे -बड़े सभी मजदूरों को काम करते देखकर ........................घर पहुची तो ब्लॉग पढ़ने लगी ......उफ्फ़ !!! कितनी गर्मी है ...............सोच रही थी मै
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राजनीति :मानस खत्री की हास्य कविता

ऐ देश के लफंगों, नेता तुम्ही हों कल के, यह देश है तुम्हारा, खा जाओ इसको तल के. चुनाव के पहले नेता घर-घर मांगने जाते हैं वोट, और फिर चुनाव के बाद, अपनी भोली जनता को, पहुचाते हैं गहरी चोट. भारत की राजनीति है एक गन्दी बहती नाली, जिसमें बैठ कर नेता, वसूलते
 
Manas Khatri
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घाघ नेता बनने के आसान उपाय

आप चाहते हैं कि आपका दर्जा चमचा से उठकर नेता का प्राप्त हो। जी हाँ चमचा जी, हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप निश्चित ही पदधारी नेता बन जाएंगे। अमल में लाइये निम्नांकित को
 
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नेताओं की कहानी, शायर ” अशोक ” की जुबानी !!!

आडवाणी जी मंदिर बनवाओगे कब तक हिन्दुओं को यूँ ही बहलाओगे कब तक देश की जनता इतनी नादां नहीं है तुम अपनी रोटी पकाओगे कब तक मनमोहन जी कुछ »
 
शायर " अशोक "
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युवा और फैशन :मानस खत्री की हास्य कविता

आज कल के युवा वर्ग का प्रेम सिर्फ फैशन है, इसीलिए तो लेते हर माँ-बाप टेंशन हैं. मोबाइल-Sms का २४ घंटे का Communication है, मात्र पैसा कमाना ही उनका निर्धारित Profession है. समय व्यर्थ करते हैं वो दिखाने में अपनी स्टाइल, इसीलिए बदल रही है सबकी Life-Style.
 
Manas Khatri
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मुहावरों की ऐसी की तैसी (व्यंग)

चीकू ने हैरान होते हुए पूछा कि यह कैसे मुमकिन है? दादा जी ने चीकू को बताया कि अब एक मुहावरा है सिर मुंड़ाते ही ओले पड़े। यह मुहावरा किसी तरह भी सिख लोगों पर लागू नहीं होता क्योंकि सिर तो सिर्फ हिंदू लोग ही मुंडवाते हैं। ऐसा ही एक और मुहावरा है, कल जब मैं
 
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मुहावरों की ऐसी की तैसी (व्यंग)

चीकू ने हैरान होते हुए पूछा कि यह कैसे मुमकिन है? दादा जी ने चीकू को बताया कि अब एक मुहावरा है सिर मुंड़ाते ही ओले पड़े। यह मुहावरा किसी तरह भी सिख लोगों पर लागू नहीं होता क्योंकि सिर तो सिर्फ हिंदू लोग ही मुंडवाते हैं। ऐसा ही एक और मुहावरा है, कल जब मैं
 
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मुहावरों की ऐसी की तैसी (व्यंग)

चीकू ने हैरान होते हुए पूछा कि यह कैसे मुमकिन है? दादा जी ने चीकू को बताया कि अब एक मुहावरा है सिर मुंड़ाते ही ओले पड़े। यह मुहावरा किसी तरह भी सिख लोगों पर लागू नहीं होता क्योंकि सिर तो सिर्फ हिंदू लोग ही मुंडवाते हैं। ऐसा ही एक और मुहावरा है, कल जब मैं
 
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लौकी पी रहे है लौकी खा रहे है

(बैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिए एक व्यंग रचा था आपसब के साथ बाँट लेती हूँ )बड़ी दर्द भरी कहानी है हमारी ,ऐसा युद्ध लड़ा है जैसा ..पूछो मत .ताई जी के बेटे की शादी का कार्ड देखकर ..कितने पकवानों के थाल आँखों के सामने घूम गए थे ..आँखे इमरती..तो दिल में
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१८ में यही होता है :मानस खत्री की हास्य कविता

१८ का पूर्ण होने पर मुझे Proud है, आप १८ के हों या न हों, पर ये रचना पढ़ना आप के लिए Allowed hai. ये कविता २१ दिसम्बर को, अपने 18th जन्मदिन के अवसर पर मैंने लिखी थी, मेरे Fans को ये कविता हास्य-व्यंग में सबसे अधिक पसंद आई है. अब तक की सबसे ज्यादा पढ़ी गई
 
Manas Khatri
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१८ में यही होता है :मानस खत्री की हास्य कविता

१८ का पूर्ण होने पर मुझे Proud है, आप १८ के हों या न हों, पर ये रचना पढ़ना आप के लिए Allowed hai. ये कविता २१ दिसम्बर को, अपने 18th जन्मदिन के अवसर पर मैंने लिखी थी, मेरे Fans को ये कविता हास्य-व्यंग में सबसे अधिक पसंद आई है. अब तक की सबसे ज्यादा पढ़ी गई
 
Manas Khatri
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कुपोषण के आंकड़ों की चिंता में बटर चिकन का डिनर (व्यंग्य)

आनन फानन में फैक्स भेजकर बाल विकास अधिकारियों व स्वास्थ्य अधिकारियों, जिला अधिकारियों को राजधानी बुलाया गया था और परिणाम स्वरूप सरकार के मुख्य सचिव कुपोषण के आंकड़ों की चिंता में बैठक ले रहे थे सरकार के जन संपर्क विभाग के अधिकारी मीटिंग के नोट्स ले रहे
 
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यहाँ ताज़ी मिठाई मिलती है : (हास्य)

नयी दुकान देखी तो- राय - कीड़े ने उंगली की. पहुँच गए राय देने . दूर से राम राम किया , खिरियत पूछी और जामा कर बैठ गए . दुकान में लगे लकड़ी के फट्टे से लेकर, भाई साहब के कॉलर के गट्टे तक , सभी का मोल भाव पूछ लिया . सब के अंत में एक बात जरुर कहते .. यार तुम
 
kanishka kashyap
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बावरिया, मुँहनोचवा और कच्छा-बनियान :मानस खत्री

क्या मिलता है तुम्हे बहा कर रक्त? क्यों बर्वाद करते हो इसमें अपना अमूल्य वक़्त? छोड़ दो इन भयानक कर्यों को, बन जाओ अच्छे इन्सान, करते हो लोगों की नींदें हराम, आतंक मचा रखा है तुमने तमाम, सहमा हुआ है नगर का हर इन्सान, अब तेरे पापों का घड़ा भर चुक है,
 
manasfaizabad
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पड़ोसी :मानस खत्री की हास्य कविता

सुबह होते ही मुँह उठाये चले आते हैं, मुफ्त की चाय पी जाते हैं. कपडा धोने के लिए तो "सर्फ" भी नहीं लाते हैं, हर रविवार को एक मुट्ठी मांग ले जाते हैं, हमारे भी हैं पड़ोसी एक, विचारों के हैं वो बहुत ही नेक. हमसे कुछ मांगने की जगह हमें ही दे जाते हैं, ज़रूरत
 
manasfaizabad
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हाय रे परीक्षा :मानस खत्री की हास्य कविता

३ घंटे में करने होते हैं लघ्भाक ४० सवाल, एक भी छूटा तो घर पर होता है बवाल. परीक्षा के एक दिन पहले, रात को नींद नहीं आती है, अच्छा नंबर पाने के लिए, भगवान की याद आती है. रखते हैं विद्यार्थी भगवन का व्रत, अगर फेल हुए तो होता है "डंडे से नृत्य".
 
manasfaizabad
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शादियाँ:मानस खत्री की हास्य कविता

लोगों को शादी का विषय है इतना भाया, की कई निर्माताओं ने इस पर हिट फिल्म भी है बनाया. जब भी मौसम है शादियों का आता, सभी का दीवाला निकल जाता. लोग अधिक लोगों को देते हैं इनविटेशन,
 
kanishka kashyap
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इस देश का प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ,नंबर वन चोर है।

किसी जरूरी काम से गाँव जाना था , आनन्-फानन कार्यक्रम बना ,तो आरक्षण भी नहीं करवा पाए । वैसे आरक्षण का मतलब ये नहीं की हम सामान्य कोच में सफ़र करने से डरते हैं , वो तो हम किसी और कारण से ऐसा करते है , जो आपको जल्द ही ज्ञात हो जाएगा । उलटे सामान्य डिब्बे
 
राजेन्द्र मीणा
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माधुरी की कसम

ग्यारवी कक्षा पास कर ली , सब का विचार था की आगे की पढाई जयपुर से करनी होगी , पर मुझे जयपुर के नाम से ही रोना आ रहा था॥ पहली बार घर से दूर , कैसे रहूँगा वहां अच्छा नहीं लगा तो इतनी दूर से भाग कर भी आ पाऊंगा या नहीं , मन में कुछ डर भी , और घर छूट जाने का
 
राजेन्द्र मीणा
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महिला दिवस और राजभाषा

मेरे मन में भी महिला दिवस और राजभाषा विचार कौंधा था तब मैं भी आपकी ही तरह आश्चर्यचकित हुआ था। आख़िरकार इस महिला दिवस पर मैं क्या लिखूँ यह सवाल तो मेरे सामने खड़ा ही था। ना जाने क्यों यह विषय मुझे नया, आकर्षक और चुनौतीपूर्ण लगा। अब आप यह मत कहिएगा कि
 
धीरेन्द्र सिंह
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व्यंग-- बुढापे की चिन्ता समाप्त

व्यंग -- बुढापे की चिन्ता समाप्त आज कल मुझे अपने भविष्य की चिन्ता फिर से सताने लगी है। पहले 20 के बाद माँ बाप ने कहा अब जाओ ससुराल। हम आ गये। फिर 58 साल के हुये तो सरकार ने कहा अब जाओ अपने घर । हम फिर आ गये। फिर दामाद जी ने सोचा सासू मां अकेले मे हमे
 
निर्मला कपिला
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ज़रुरत है हिंदी पुरस्कारों के लिए

ज़रुरत है हिंदी पुरस्कारों के लिएकवियों, लेखकों और साहित्यकारों की एक कवयित्री चाहिएजिसका रंग गोरा, कद ५ फीट ३ इंच बायें गाल पर तिल हो जिसने ख़ूब खूबसूरती पाई हो और अपनी हर कविता मेंमर्दों की की धुनाई होऐसा हो तो अच्छा है और उसके हर
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बर्थ सर्टिफिकेट ऑफ़ लॉर्ड रामा

पवनपुत्र हनुमान बड़े ही चिंतित दिखाई दे रहे थे। उनकी भावभंगिमा से वे किसी उहापोह में लगते थे। आकुल-व्याकुल से वे अपने प्रभु श्रीराम के पास पहुँचे तो उन्हें ऐसे बदहवास देख कर भगवान राम भी घबरा उठे।प्रभु बोले, ‘हनुमान ये क्या दशा हो गई तुम्हारी? लोग अपनी
 
हिन्दी विकास मंच
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हंसी पर "कर" लागू !!!!

जी हाँ दोस्तों अभी जितना हंसना है हंस लीजिये, वरना बढ़ती महंगाई को देखते हुए लग रहा है की आनेवाले समय में हंसी पर लगेगा "कर" यानि टैक्स "हास्य कर"|जिसमे हंसी को विभक्त किया जाएगा ३ भागों में|१) मंद हंसी२)लघु हंसी३) अट्टहास मंद हंसी इस हंसी में जैसे
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साहित्यिक लफ्फाजी ...........( व्यंग )

लेखन से भी एक बड़ा गुण है ' लफ्फाजी ' किसी तरह की बाजी न होते हुए भी इसके अंत में 'जी 'लगा हुआ है जो इसके सम्माननीय होने का प्रमाण है !जो शब्द ख़ुद ही सम्माननीय हो तो उसे धारण करने वाला तो परम सम्माननीय स्वतःही हो जाता है !जैसे 'महागप्प' को साहित्य म
 
ललितमोहन त्रिवेदी
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ये उम्र और लंगड़ी

आज एक पूरा हफ्ता निकल गया कोई ब्लाग नहीं लिखा गया। तो प्रश्न है कि “आखिर क्यों नहीं लिखा गया?” अकस्मात् बस एक ही उत्तर दिमाग में कौंधता है और वह यह कि- “जी लंगड़ी खेल रहे थे।“ तो ये लिजिए एक और प्रश्न सामने आ खड़ा होता है- “ये उम्र और लंगड़ी?” सच! कि
 
रानी पात्रिक
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ये समाचार चैनल या पंचकूटे की भाजी...

फळी, काचरा,टमाटर.मिर्ची,कमल गट्टा,सांगरी,टिंडे,भिंडी याने बची खुची सारी सब्जियों का बङा स्वादिष्ट मिश्रण जिसे राजस्थान में  पंचकूटे की भाजी कहते हैं बहुत ही स्वादिष्ट होती है पर कोई ये पूछे की उस भाजी में सही सही क्या है,या क
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प्रत्याशी से पूछताछ

एक एम.एल. उम्मीदवार से चुनाव समिति ने निम्न प्रश्न पूछे ! अब आप बताएंगे कि चुनाव समिति ने सवाल क्यों पूछे - और इनकी प्रासंगिकता क्या है ? जिला प्रमुख सुजीत जायसवाल ने पार्टी से एम.एल.ए. का टिकट मांगने का निश्चय कर , चुनाव समिति के समक्ष साक्षात्कार क
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अच्छा ही है, कि श्रीलंका और पाकिस्तान में आपस में दुश्मनी नहीं है

आपको लगता होगा कि भारत को चीन से खतरा है, पाकिस्तान से खतरा है. पर मैं आपको आज एक अन्दर की बात बताता हूँ. किस्सा कुछ इस तरह है. कुछ दिनों पहले आपको याद होगा कि पाकिस्तान में श्रीलंका क्रिकेट खिलाडियों पे हमला हुआ था, और श्रीलंका के खिलाडी किसी तरह से
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दस करोड़ की लाटरी

वर्षीय एक सज्जन की दस करोड़ की लाटरी लग गई। इतनी बड़ी खबर सुनकर कहीं दादाजी खुशी से मर न जाएं, यह सोचकर उनके घरवालों ने उन्हें तुरंत जानकारी नहीं दी। सबने तय किया कि पहले एक डॉक्टर को बुलवाया जाए फिर उसकी मौजूदगी में उन्हें यह समाचार दिया जाए ताकि दिल
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भारत में ट्रिपल "बी" की बीमारी

जी हाँ चौंकिए मत! ट्रिपल "बी"यानि (बुत्तोक्क, बरेअस्त बेल्ली अंग्रेजी के शब्द है) हिन्दी में नितंभ, छाती और चीतल मांछी पेट कहते है। भारत में यह बीमारी कुछ एक युवतियों और महिलाओं में अर्धनग्न फैशन से फैला है। इस बीमारी की सबसे खास बात ये है की इससे पुरूष
 
सुरेन्द्र Verma
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राजभाषा के राग

राजभाषा को देश अभी भी समझ रहा है। इस समझ में ऊभरे नए-नए विचारों की नई-नई बोलियॉ होती हैं पर सबसे मज़ेदार बात यह है कि इन बोलियों के भाव दशकों पुराने होते हैं। चूँकि राजभाषा हिन्दी को अभी भी हमारा देश समझने में की प्रक्रिया में है इसलिए इन रागों को अब भी
 
धीरेन्द्र सिंह
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जब गधे राज करते हैं!!

यह लेख आने वाले एक लेख की नीव डाल रहा है, अत: इसके मर्म को समझना जरूरी है. जंगल का राजा शेर बहुत ही समतावादी और समन्वयवादी था अत: उसने मंत्रिमंडल में हर प्रकार के जानवरों को शामिल करने का निर्णय ले लिया. इस तरह के प्रतिनिधि जोडे जा रहे थे तो गधे के ब
 
Shastri JC Philip
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लोकतांत्रिक सामंतवाद : जय हो

सत्तर के शुरुआती दिनों मे विविधभारती की विज्ञापन सेवा जब मनोरंजन के क्षेत्र को एक नया आयाम दे रही थी। नए-नए विज्ञापन भी खासे आकर्षक बनाए जाते थे। उन दिनों के कुछ चर्चित विज्ञापन, मुझे उनकी बिंदास आवाज और स्टाइल के कारण बहुत पसंद थे। भविष्य की संभावना
 
सुमन्त मिश्र ‘कात्यायन’
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अडवाणी का चुंबन और थप्‍पड़

मुशर्रफ, अडवाणी जी , ऐश्वर्या राय और सोनिया एक ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं। ट्रेन एक सुरंग से निकलती है ट्रेन में अंधेरा हो जाता है। अचानक वहां एक चुंबन ध्वनि और फिर एक थप्पड़ की आवाज आती है। ट्रेन सुरंग से बाहर आती है।सभी चुपचाप बैठे रहते हैं कोई कु
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जन्‍मदिवस पर पंगेबाज को मिला मंत्रीपद, पाला बदलने से महत्‍वपूर्ण औहदो से नवाजे गये भगवा ब्‍लागर

आज प्रधानमंत्री मन मोहन सिंह की ओर से उनके निजी सचिव ने भारत के नम्‍बर एक चिट्ठाकार पंगेबाज को उनके 44 वें जन्‍मदिवस पर स्थिर सरकार का तौफहा भेजा। पंगेबाज के जन्‍मदिवस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अब हमें मजबूत सरकार के लिये आपका सर्मथन चाहि
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प्रौद्योगिकी से प्रीत

व्यक्ति की चाहत हो या ना हो प्रौद्योगिकी से प्रीत करनी ही पड़ती है। आज प्रौद्योगिकी ललकार रही है कि मुझसे बच कर दिखाओ तो जानें। चमकती स्क्रीन से आँखें प्रभावित हो सकती है, चश्मा आँखों से या आँखें चश्मे से बेपनाह मुहब्बत शुरू कर सकती हैं, अंगुलियों मे
 
धीरेन्द्र सिंह
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अलसाया मौसम

मौसम के अलसाया होने से अनेकों प्रभाव होते हैं तथा एक खामोश उदासी लिपटी रहती है। मौसम के मिज़ाज को दो लोग बखूबी पढ़ते रहते हैं या यूँ कहें कि मौसम से दो लोग बहुत जल्दी प्रभावित होते हैं एक तो मौसम विभाग तथा दूसरे कवि। मौसम में जो उतार-चढ़ाव आते रहता है उ
 
धीरेन्द्र सिंह
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