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महिला मुक्केबाज : सोनम यादव

कजाखस्तान के अस्ताना में में चल रही छठी एशियाई महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारत की 11 सदस्यीय टीम में यदुवंशी सोनम यादव भी शामिल हैं। यहाँ महिला मुक्केबाज पहली बार तीन वजन वर्गों में पदार्पण करेंगी। 23 से 31 मई तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में 16 देशों
 
Ram Shiv Murti Yadav
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कुश्ती का जांबाज सितारा : नरसिंह यादव

सीनियर एशियाई कुश्ती प्रतियोगिता में मुंबई के पहलवान नरसिंह यादव ने देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाकर यदुवंश के साथ-साथ पूरे देश का नाम रोशन किया है। नरसिंह यादव ने 12 मई, 2010 को ईरान के पहलवान सईद रियाही को 74 किग्रा फ्री स्टाइल वर्ग में तकनीकी श्रेष्ठता
 
Ram Shiv Murti Yadav
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पेशावर कांड के नायक थे चन्द्र सिंह गढ़वाली

चन्द्र सिंह गढ़वाली का जन्म 25 दिसम्बर 1891 में हुआ था। चन्द्रसिंह के पूर्वज चौहान वंश के थे जो मुरादाबाद में रहते थे पर काफी समय पहले ही वह गढ़वाल की राजधानी चांदपुरगढ़ में आकर बस गये थे और यहाँ के थोकदारों की सेवा करने लगे थे। चन्द्र सिंह के पिता का नाम
 
विनीता यशस्वी
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लोक-इतिहास के बेजोड़ विद्वान : गोविंद अग्रवाल

लोक संस्‍कृति शोध संस्‍थान नगरश्री चूरू के विषय में मेरी पोस्‍ट के माध्‍यम से थोड़ा-सा जिक्र किया था। इस संस्‍थान के प्राण इतिहासकार श्री गोविंद अग्रवाल के विषय में भी लिखने को मेरा मन चाहा। लोक इतिहास की परम्‍परा में 'चूरू मण्‍डल का शोध पूर्ण इतिहास'
 
दुलाराम सहारण
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लोकजागरण के अप्रतिम आस्था थे सप्रे जी

पुण्यतिथि पर विशेष रमेश शर्मा समूची १९ वीं सदी को भारतीय पत्रकारिता के मानक मूल्यों के लिहाज से स्वर्णयुग मानने वालों की कमी नहीं है। उस सदी की शुरुआत में ही छत्तीसगढ़ के पेंड्रा इलाके से हिंदी पत्रकारिता की मशाल लिए लोकजागरण की राह पर चले पं. माधवराव
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कृष्ण कुमार यादव को अक्षर शिल्पी सम्मान-2010

म0प्र0 के प्रतिष्ठित राजेश्वरी प्रकाशन, गुना ने युवा साहित्यकार एवं भारतीय डाक सेवा के अधिकारी श्री कृष्ण कुमार यादव को उनके विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु ’’अक्षर शिल्पी सम्मान-2010’’ से विभूषित किया है।
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मुलायम सिंह यादव का अखाड़ा पूरा देश

सत्तर साल के हो चुके मुलायम सिंह यादव छोटे कद के जरूर है मगर एक जमाने में अच्छे खासे पहलवान हुआ करते थे। अखाड़े में अपने से दुगुने कद के लोगों को धोबी पाट दांव लगा कर चित कर दिया करते थे और कई दंगलों के वे विजेता हैं। राजनीति में तो वे बहुत बाद में आए।
 
Ram Shiv Murti Yadav
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र को कनाडा का सर्वोच्च नागरिक सम्मान

कनाडा में भारतीय मूल के वैज्ञानिक श्रवण कुमार को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया है। इस सम्मान को 'द आर्डर ऑफ कनाडा' कहा जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1967 में की गई थी। गत 40 वर्षो में यह पुरस्कार 5,000 से अधिक लोगों को दिया जा चुका है।
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हिन्दी के भगीरथ : महामना मदन मोहन मालवीय

इतिहास जब हिन्दी को राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिष्ठित कराने का श्रेय किसी को देगा तो पहला नाम महामना पं. मदन मोहन मालवीय का होगा। १९वीं शताब्दी तक उत्तर प्रदेश की राजभाषा के रूप में हिन्दी का कोई स्थान नहीं था। परन्तु २० वीं सदी के मध्यकाल तक वह भारत की
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राजेंद्र यादव की तूलिका के तेवर

अभी तक यदुकुल ब्लॉग पर आपने राजनेता-प्रशासक-साहित्यकार-कलाकार-अभिनेता-खिलाडी-जाबांजों के किस्से सुने, अब पहली बार इस ब्लॉग पर आपका परिचय एक कार्टूनिस्ट और एनिमेटर से कराते हैं। राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले युवा राजेंद्र यादव फ्री-लांसर के रूप में
 
Ram Shiv Murti Yadav
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उस व्यक्ति के लिये ....

उस व्यक्ति के लिये जिसका कोई स्थानापन्न नहीं मेरे जीवन में ---आदर्श चुक जाता है वहाँ, विचार झनझनाने लगते हैं । चिन्तना कुछ मुखरित हो अपने सम्पूर्ण स्वरूप में संकलित होने लगती है । दृष्टि उलझने लगती है - कुछ अनचीन्हें, कुछ अनजाने या फिर अन्तर्निहित तत्वों
 
हेमन्त कुमार
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भावनाओ की रेशमी चादर बुनता "हृदय गवाक्ष" छु गया दिल को

आजकल मैं "एय्यार" बन ब्लॉग दुनिया में भटकता रहता हूँ। यह समय कुछ वैसा ही हैं जब मैं पुस्तकालय मेंसीलन भरे कोनो में पुस्तकें खोजता था। बरसो पूरानी किताबो के पीले पन्ने पलटते हुए न जाने समय कैसेगुजरता था। वही हाल कईं बार इधर भी हो जाता हैं।ऐसे ही घूमते हुए
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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भावनाओ की रेशमी चादर बुनता "हृदय गवाक्ष" छु गया दिल को

आजकल मैं "एय्यार" बन ब्लॉग दुनिया में भटकता रहता हूँ। यह समय कुछ वैसा ही हैं जब मैं पुस्तकालय मेंसीलन भरे कोनो में पुस्तकें खोजता था। बरसो पूरानी किताबो के पीले पन्ने पलटते हुए न जाने समय कैसेगुजरता था। वही हाल कईं बार इधर भी हो जाता हैं।ऐसे ही घूमते हुए
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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ब्लागर- साहित्यकार-प्रशासक के.के. यादव के निदेशक बनने पर अभिनन्दन व विदाई

ब्लागिंग और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय तथा भारतीय डाक सेवा के अधिकारी कृष्ण कुमार यादव को निदेशक पद पर प्रोन्नति के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह में भावभीनी विदाई दी गई। केंद्र सरकार के एक अधिकारी के साथ-साथ साहित्यकार के रूप में चर्चित केके यादव की
 
Rashmi Singh
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काका बहुत याद आते हैं

हिंदी हास्य कविता जगत के सातवे आसमान पर विराजमान श्री प्रभुनाथ गर्ग को हम सब लोग किस नाम से जानते हैं --- जी हाँ, अपने प्यारे काका हाथरसी । राजनीति और सरकारी तंत्र की खामियों को काका मजाकिया अंदाज में बोल डालते थे। शब्दों का खेल खेलने में माहिर काका की
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शास्त्रीय नृत्य से रोग भगातीं मनीषा यादव

शास्त्रीय नृत्य से आप सभी वाकिफ होंगे। इसके बारे में सुनते ही जेहन में कत्थक करती किसी नृत्यांगना की तस्वीर उभर आती है। लेकिन क्या आपको इस बात का इल्म है कि यह शास्त्रीय नृत्य मात्र एक कला नहीं बल्कि दवा भी है। इस बात पर अपनी सहमति की मोहर लगाती हैं
 
Ram Shiv Murti Yadav
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दक्षिण में हिन्दी के ध्वजवाहक

शुरू में जब विद्याधर जी मुस्लिम महिलाओं को पढ़ाने जाते तो वे बीच में पर्दा टांग दिया करती थीं। बाद में विद्याधर जी के व्यक्तित्व और कर्तव्यनिष्ठा से प्रभावित हो उन्होंने पर्दा टांगना बंद कर दिया। धीरे-धीरे वह समय भी आया जब उन्हीं मुस्लिम महिलाओं ने उन्हें
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आधुनिक लखनऊ के परिकल्पकः वी0आर0 मोहन

भारत में बहुत से उद्योगपति हुए हैं और हैं लेकिन वेद रत्न मोहन ऐसे उद्योगपति थे जो सामाजिक दायित्व के संदर्भ में अपने उद्योग को विकसित करना चाहते थे। लखनऊ से उनका प्रेम जग-जाहिर है लखनऊ प्रवास के दौरान शहर के सौन्दर्यीकरण में किए गए उनके प्रयासों व
 
आशीष वशिष्ठ
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जस की तस चदरिया छोड़ गये प्रभाष जी

प्रभाष जी 'पाबंदी' के हमेशा विरोधी रहे। पत्रकारिता उनके लिए एक मिशन थी। व्यवसायिक मूल्यों की प्रतिष्ठा के लिए भी वे सक्रिय रहे। देश का अधिकांश मीडिया जब चुनाव में 'पैकेज' बेच रहा था, तब प्रभाष जी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई। आज लगभग सभी स्वतंत्र पत्रकार
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प्रभाष दीपो भव

मेरे पास सिर्फ पांच साल बचे हैं। अब मुझे पक्की बातें कह देनी चाहिए। जो देखा, समझा और अनुभव किया उसे लिख देने का यही समय है।' अपना यह विचार एक लंबी बातचीत के दौरान प्रभाष जी ने बताया। 12 अगस्त, 2007 वो तारीख थी। उस दिन थोड़ी फुरसत में थे क्योंकि वह मुल
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बढ़ते चरण शिखर की ओर: एक विहंगावलोकन

साहित्य और साहित्यकार दोनों एक ही नव निर्माण प्रक्रिया के दो पहलू होते हैं। इस दृष्टि से किसी भी साहित्यकार के कृतित्व के अध्ययन के लिए उसके व्यक्तित्व का अध्ययन महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि सर्जक व्यक्तित्व के निर्माण में सहायक घटनाएँ जैसे पूर्व
 
Rashmi Singh
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भारतीय साहित्य का धर्मयुग

उस समय हिन्दी को जिस घर में जरा भी समझा जा सकता था या हिन्दी से तनिक भी प्यार था, वहां धर्मयुग का आना अनिवार्य हो गया था। यानी भारती जी ने धर्मयुग के माध्यम से हिन्दी के पाठकों की संख्या बहुत अधिक बढ़ाई।
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वो डोलत रस आपने उनके फाटत अंग!

अगर आप कमज़ोर हैं या लोग आपको कमज़ोर समझ रहे हैं तो आपकी अच्छाइयाँ/प्रतिभा उन शक्तिशाली लोगों की गुलाम बन सकती है जो केवल अपने बारे में सोचते हैं। मीठे ज़हर के असर की तरह आप उनके चंगुल में फंस सकते हैं। इसलिए लालच न करके अपने व्यक्तित्व को शक्तिशाली बना
 
प्रेमलता पांडे
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शव की शादी देख बदल गया जीवन

वो अपने साथियों के साथ गांव घूम ही रहे थे कि वो एक घर के सामने का दृश्य देखकर ठिठक गए। उन्होंने देखा कि एक महिला शव के पास दुल्हन के वेश में बैठी है और उसके विवाह की रस्में निभायी जा रही हैं।
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कोई महामाया प्रसाद भी थे

दूसरे दिन समाचार-पत्रों में महामाया प्रसाद के निधन का समाचार पढने को मिला। साथ ही यह भी पढने को मिला कि शासन तथा प्रशासन ने इस महान व्यक्ति की किस प्रकार उपेक्षा की कि उनका शव ट्रैक्टर पर लाद कर उनके पैतृक गांव पटेढा-पटेढी भेजा गया।
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धूमिल की उपेक्षा क्यों?

धूमिल' का अभाव एवं संघर्षं से सीधा जुड़ाव था। अपनी कविता की रक्षा के लिए इन्हें मजदूरी करना पसंद था लेकिन किसी की चाटुकारिता अथवा उपकार के तले दबकर रहना धूमिल जैसे व्यक्ति की प्रवृत्ति नहीं थी।
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टेलीफोन के जन्मदाता महान वैज्ञानिक ग्राहम बेल (जयंती पर विशेष)

दुनिया में संचार क्रांति लाने वाले टेलीफोन के आविष्कारक महान वैज्ञानिक अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने सिर्फ 29 साल की ही उम्र में ही 1876 में टेलीफोन की खोज कर ली थी। इसके एक साल बाद ही 1877 में उन्होंने बेल टेलीफोन कंपनी की स्थापना की। इसके बाद वह लगातार
 
Rashmi Singh
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सपने जो बिखर गए

जे.पी. क्रान्ति के माध्यम से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का विकास चाहते थे तथा विकास की प्रक्रिया की शुरूआत भी उसी अंतिम व्यक्ति से करना चाहते थे। इस चीज के लिए उन्होंने एक नया शब्द खोजा था- 'अंत्योदय'। यानी जो सबसे गरीब और असहाय है उसकी चिन्