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वीरेन्द्र जैन की व्यंग्यजल -हमारा बहुमत है
हमारा बहुमत हैहम जो चाहे करें, हमारा बहुमत हैदेश समूचा चरें, हमारा बहुमत हैवोट बटारें नैतिकता पर, फिर उसकीमिल कर चटनी करें, हमारा बहुमत हैआलू प्याज सरीखे मत भी बिकते हैंदेकर ऊंची दरें, हमारा बहुमत हैमँहगाई से, दंगों से, हुड़दंगों सेलोग जियें या मरें,
Aug 04 2009 04:12 PM



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