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व्यंग्यजल - इतना पैसा कहाँ से आया नेताजी

हमें नहीं क्यों ये बतलाया नेताजीइतना पैसा कहाँ से आया नेताजीनोट छापने की मशीन लगवायी हैया घर में चकला चलवाया नेताजीहमने तो तुमको संसद में भेजा थामगर वहाँ तू नजर न आया नेताजीजनता ने अपनी आवाज तुझे सोंपीतू ने जब तब हाथ उठाया नेताजीकहता रहता था कि भूख नहीं
 
वीरेन्द्र जैन