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व्यंग्य- पड़ोसी प्रेम्

व्यंग्यपड़ौसी प्रेमवीरेन्द्र जैन जिनसे हमारे सबंध खराब होते हैं, वे मुझे पड़ोसी की तरह लगने लगते हैं क्योकि किसी पड़ोसी से हमारे सबंध कभी अच्छे नहीं रहे। इस मामले में हमारा हाल भारत सरकार जैसा है न उनके सबंध पड़ोसियों से अच्छे रहते है, और न हमारे। पाकिस्तान
 
वीरेन्द्र जैन