समीक्षा-हम्माम के बाहर भी- शंकर पुंताम्बेकर्
समीक्षा हम्माम के बाहर भी शंकर पुंताम्बेकर 'हम्माम के बाहर' भी वीरेन्द्र जैन लिखित छोटीबड़ी रचनाओं का एक ऐसा व्यंग्य संग्रह है जिसे सुधी पाठक बारबार पढ़ना चाहेगा। हरीश नवल, रामविलास जांगिड़, अरविन्दर निपारी, जवाहर चौधरी जैसे कुछ लेखक इधर व्यंग्य में ऐसा कुछ
Apr 14 2010 05:00 AM



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