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आदर्श की बातें-हिन्दी शायरी

गनीमत है इंसान के पांव सिर्फ जमीन पर चलते हैं, उस पर भी जिस टुकड़े पर जमें हैं उसे अपना अपना कहकर सभी के सीने तनते हैं, हक के नाम पर हर कोई लड़ने को उतारू है। अगर कुदरत ने पंख दिये होता तो आकाश में खड़े होकर हाथों से एक दूसरे पर आग बरसाते, [...]
 
दीपक भारतदीप
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सच्ची मोहब्बत-हिन्दी शायरी (sachchi mohbbat-hindi shayari)

मोहब्बत और मोहब्बत में फर्क होता है, एक ढलती उम्र के साथ कम हो जाती है दूसरी मतलब निकलते ही खत्म हो जाती है। जिसमें रिश्ते निभाने की न मजबूरी हो, ऐसी उम्मीद न की जायें, जो न पूरी हों, दिल का सौदा दिल से हो तो भी पाक नहीं हो जाता, जिस्मानी लगाव मतलब [...]
 
दीपक भारतदीप
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एक मंचीय व्यंग्य कविता------------------------------------>>>दीपक 'मशाल'

आज से करीब १२ वर्ष पूर्व एक व्यंग्य कविता लिखी थी लेकिन शायद वो आज भी समसामयिक है, प्रासंगिक है और सालों तक रहेगी. लगा कि आपको भी पसंद आएगी... आती है या नहीं ये तो पढ़ने के बाद ही पता चलेगा. देखिएगा तनिक- एक 'तथाकथित' सम्माननीय नेता
 
दीपक 'मशाल'
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दुष्यंत की ग़ज़लों की पैरोडी -1

दुष्यंत की गजलों की पैरोडियाँ - 1 यह 1974-75 के साल थे जब दुष्यंत कुमार की गजलें सारिका और धर्मयुग में छपना प्रारंभ हुयी थीं व मैं इन पत्रिकाओं की प्रतीक्षा प्रेमिका की तरह किया करता था। मेरी राजनीतिक सोच के कारण मुझे इन गजलों ने भीतर तक छू लिया था।
 
वीरेन्द्र जैन
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स्वर्ग का स्टे

एक साधु ने अपने स्वार्थ हेतु एक सेठ को बरगलाया और उसे नारकीय पीड़ा का दिल दहला देने वाला लगभग आंखों देखा हाल सुनाया। बोला, -रे अधम, जब यम के दूत तुझ लेने आयेंगे तो तेरे ये सारे ठाट बाट धरे के धरे रह जायेंगे लेकिन सेठ बिल्कुल भी नहीं घबराया क्योंकि वह
 
वीरेन्द्र जैन
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कोई नहीं देखेगा..सविता भौजाई को ..

सरकार की हुई पाबंदी, अब कोई, नहीं देखेगा, सविता भौजाई को... देखना अच्छी बात नहीं है, यूँ किसी भी नार पराई को, सविता भौजी के पति तो होंगे, फिर काहे छूट मिले, पति के भाई को, बलात्कार, यौनाचार,व्यभिचार न बंद हुआ तो क्या, हर हाल में बंद करो , बेहयाई को..
 
अजय कुमार झा
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नोट सौ सौ के टूट जाते हैं

ज़िन्दगी इस कदर उदास हुयी अब वो नाराज़ तक नहीं होती नोट सौ सौ के टूट जाते हैं और आवाज़ तक नहीं होती
 
वीरेन्द्र जैन