विष्णु नागर के नये संग्रह से चार कविताएँ
दो यात्राएँ------मैं एक यात्रा में एक और यात्रा करता हूँएक जगह से एक और जगह पहुँच जाता हूँ कुछ और लोगों से मिलकर कुछ और लोगों से मिलने चला जाता हूँकुछ और पहाड़ों, कुछ और नदियों को देख कुछ और ही पहाड़ोंकुछ और नदियों पर मुग्ध हो जाता हूँ इस यात्रा में मेरा
Feb 24 2010 04:51 PM



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