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स्त्रियों की खिलखिलाहटें - लाइज़ेल म्यूलर / अनुवाद तथा प्रस्तुति : यादवेन्द्र

स्त्रियों की खिलखिलाहटेंधू धू कर जला देती हैं अन्याय के महल चौबारेऔर झूठी मनगढ़ंत कहानियाँइनमे तप कर सुन्दर सफ़ेद दीप्ति से निखर जाती हैं...ये संसदीय गलियारों को थर्रा देती हैंखिडकियों को धक्के मार मार करखोल डालती हैं पूरा प्रशस्तजिस से धज्जियाँ बन बन कर
 
शिरीष कुमार मौर्य
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लूसिले क्लिफ्टन : यादवेन्द्र

इस वर्ष फरवरी में ७३ वर्ष की आयु में स्तन कैंसर से १६ वर्षों तक जूझने के बाद प्रसिद्ध अमेरिकी अफ़्रीकी कवियित्री लूसिले क्लिफ्टन (१९३६-२०१०)का निधन हुआ.अमेरिका में उन्हें अपनी अश्वेत बिरासत का गर्व करने के साथ साथ बेवाकी,चुटीलेपन और स्त्रीवादी सोच के लिए
 
शिरीष कुमार मौर्य
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प्रेम की पाठ्यपुस्तकें नहीं होतीं

सीरिया के सर्वाधिक प्रसिद्ध कवियों में गिने जाने वाले महान अरबी कवि निज़ार कब्बानी (1923-1998) की कुछ कविताओं के अनुवाद आप पहले भी पढ़ चुके हैं । आज प्रस्तुत है उनकी दो छोटी कवितायें : (अनुवाद : सिद्धेश्वर सिंह)०१- विलग करो वसन विलग करो वसन निज देह
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गाज़ा में कविता है लापता : बफ़ व्हिटमन-ब्रॅडली

गाज़ा में कविता है लापतागाज़ा में कविता है लापताहालाँकि उसके देखे जाने की छुटपुट और अपुष्ट सूचनाएं हैंएक कहता है कि उसे गटर से बहते हुएउफनती हुई खून की नदी में मिलते देखादूजा खबर देता है कि बम फटने से मलबे और मिट्टी में बदल गईइमारत के नीचे उसकी चीखें
 
भारत भूषण तिवारी
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कविता की काया को देखना- दूसरी किस्त /प्रस्तुति यादवेन्द्र

अब्बास कैरोस्तामी की ही एक और फिल्म है विंड विल कैरी अस, जो आधुनिक फारसी कविता की बेहद महत्वपूर्ण स्तम्भ फ़रोग फ़रोख्जाद की इसी शीर्षक की कविता से प्रभावित है.इस फिल्म में यूँ तो जीवन मृत्यु के सवाल को अपनी तरह से देखने का प्रयास किया गया है,पर फिल्म जिस
 
शिरीष कुमार मौर्य
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कविता की काया को देखना - प्रस्तुति : यादवेन्द्र

अब्बास कैरोस्तोमी आधुनिक ईरानी सिनेमा के शिखर पुरुष माने जाते हैं,इतना ही नहीं सिनेमा विशेषज्ञ उन्हें आज दुनिया के दस सर्व श्रेष्ठ फिल्म निर्देशकों में गिनते हैं.उन्होंने साहित्य की गहरी समझ वाले सिनेमा की नयी भाषा गढ़ी है,जिसमे इरान के श्रेष्ठ कवियों की
 
शिरीष कुमार मौर्य
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विश्व रंगमंच दिवस (२७ मार्च) पर विस्साव शिम्बोर्स्का की कविता

दुखांतमेरे लिए दुखांत नाटक का सबसे मार्मिक हिस्साइसका छठा अंक है जब मंच के रणक्षेत्र में मुर्दे उठ खड़े होते हैं अपने बालों का टोपा संभालते हुएलबादों को ठीक करते हुएजब जानवरों के पेट में घोंपे हुए छुरे निकाले जाते हैं।और फांसी पर लटके हुए शहीदअपनी
 
pratibha
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बख्तियार वहाब्ज़ादे : अनुवाद एवं प्रस्तुति- यादवेन्द्र

१९२५ में जन्मे बख्तियार वहाब्ज़ादे अजरबैजान के सबसे प्रसिद्द कवियों में शुमार किये जाते हैं.अजरबैजान की आज़ादी के लिए सोविएत संघ से अलग होने की लड़ाई में उनका सक्रिय योगदान रहा है...खास तौर पर अज़र भाषा को ले कर वे खासे संवेदनशील रहे हैं. अपनी भाषा के
 
शिरीष कुमार मौर्य
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नाज़िम हिक़मत की एक कविता

अनुवाद एवं प्रस्तुति : यादवेन्द्रतुर्की के विश्व प्रसिद्द कवि नाज़िम हिक़मत की ये बेहद चर्चित युद्ध विरोधी कविता हिरोशिमा पर अमेरिकी अणु बम गिराए जाने के दस साल बाद लिखी गयी थी और दुनिया की सभी प्रमुख भाषाओँ में न केवल इसका अनुवाद हुआ बल्कि अनेक देशों के
 
शिरीष कुमार मौर्य
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रीता पेत्रो की कविताएँ - अनुवाद एवं प्रस्तुति यादवेन्द्र

१९६२ में अल्बानिया की राजधानी तिराना में जनमी रीता पेत्रो स्टालिन कालीन साम्यवादी पाबंदियों से मुक्त हुए अल्बानिया की नयी पीढ़ी की एक सशक्त कवियित्री हैं.उन्होंने तिराना विश्वविद्यालय से अल्बानी भाषा और साहित्य की डिग्री ली और बाद में एथेंस विश्वविद्यालय
 
शिरीष कुमार मौर्य
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I, Too, Sing America

फरवरी माह अमेरिका,कनाडा और ब्रिटेन में ब्लैक हिस्ट्री मन्थ के तौर पर मनाया जाता है. 1926 में नीग्रो हिस्ट्री वीक के रूप में शुरू हुए इस दस्तूर की प्रासंगिकता और उपादेयता पर हाल के वर्षों में सवाल भी उठाये गए हैं.अनुनाद इस मौके पर याद कर रहा है हार्लम
 
भारत भूषण तिवारी
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ख़ुद को परिभाषित करती स्त्री : कुछ बिम्ब / ईरानी कविता

ईरान की आधुनिक कविता ख़ुद को परिभाषित करती स्त्री : कुछ बिम्बईरान की युवा कवियत्रियों को मैं यहाँ पहले भी प्रस्तुत कर चुका हूँ.इस बार इनकी कुछ छोटी कवितायेँ पढवाने की मंशा है जिसमे अपने देश में व्याप्त धार्मिक,सामाजिक और राजनीतिक प्रतिबंधात्मक माहौल के
 
यादवेंद्र,रुड़की
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मेदी लोकितो

मेदी लोकितो १९६२ में जनमी इंडोनेशिया की आधुनिक काव्य धारा की चर्चित कवि हैं . दो बच्चों की माँ लोकितो चीनी मूल की इंडोनेशियाई कवि हैं.उनका कहना है कि साहित्य उनका लक्ष्य था नहीं पर एक बड़े और लोकप्रिय इंडोनेशियाई कवि और फिल्मकार की प्रेरणा से उनका
 
यादवेंद्र,रुड़की
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"गर्भपात" पर ग्वेंडोलिन ब्रुक्स और सीमा शफ़क की कविताएँ

अनुवाद और प्रस्तुति - यादवेन्द्र साल के पहले दिन ग्वेंडोलिन ब्रुक्स की एक कविता लगायी थी ---उसी समय मैंने मित्रों से वायदा किया था की जल्दी ही उनकी और कवितायेँ पढने को लेकर आऊंगा . यहाँ मैं १९४५ में छपी ब्रुक्स की एक बेहद महत्वपूर्ण कविता लगा रहा हूँ
 
शिरीष कुमार मौर्य
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हम यहाँ आए थे और कोई अर्थ नहीं था हमारे होने का

मात्र इक्कीस बरस का लघु जीवन लेकिन तमाम तरह बड़ी इच्छाओं और उम्मीदों से भरापूरा। राजनीतिक , सामाजिक सामाजिक रूप से सक्रिय जीवन और ह्रूदय में पलते - पनपते उद्गार। कुछ ऐसा ही जीवन और जगत पाया पोलैंड की एक अन्चीन्ही कवयित्री ग्राज़्यना क्रोस्तोवस्का ने।
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अब मैं अनुपस्थित इच्छाओं की एक चमकीली राख हूँ

आधुनिक पोलिश कविता के बड़े नामों -विस्वावा शिम्बोर्स्का और हालीना पोस्वियातोव्सका की कवितायें आप इसी जगह पढ़ चुके हैं। ये वे नाम हैं जिनके कारण पोलैंड के साहित्य के जरिए एक दुनिया से परिचित होते हैं और अपनी दुनिया को एक नई निगाह से देखने के लिए कोशिश की एक
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मृत्यु की इच्छा करने वाले युवक के लिए - ग्वेंडोलिन ब्रुक्स

अनुवाद तथा प्रस्तुति : यादवेन्द्र ग्वेंडोलिन ब्रुक्स (जून १९१७-दिसम्बर २०००)अमेरिका कि सर्वाधिक चर्चित और प्रतिष्ठित अश्वेत कवियों में एक --- बचपन शिकागो में बीता.पड़ोस में और स्कूल में नस्ली भेदभाव का दंश झेलना पड़ा,यहाँ तक कि एक स्कूल छोड़ कर दूसरे पूर्ण
 
शिरीष कुमार मौर्य
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मारियो सुसको की कविताएँ

बोस्निया के युद्ध की विभीषिका झेल चुके मारियो सुसको सरायेवो के रहने वाले हैं. 1993 में सरायेवो छोड़ कर अमेरिका में बस गए सुसको के अट्ठाइस कविता संग्रह प्रकाशित हैं. वे एक उत्कृष्ट सम्पादक और अनुवादक भी हैं, उनकी कविताओं को कई सम्मान प्राप्त हुए हैं. प
 
भारत भूषण तिवारी
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अबू ताहा अपनी छत पर कबूतर पालता है: एप्रिल जॉर्ज

एप्रिल जॉर्ज की यह कविता (मूल अंग्रेजी में) दि नवेम्बर थर्ड क्लब के अद्यतन अंक में प्रकाशित हुई है. अबू ताहा अपनी छत पर कबूतर पालता है बगदाद में अबू ताहा अपनी छत पर कबूतर पालता है. सलेटी, भूरे, चितकबरे, कंठीदार. सूरज ढलते वक़्त, वे करते हैं गुटरगूं ज
 
भारत भूषण तिवारी
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सभ्यता के गलियारे में रखे हुए टायर: मार्टिन एस्पादा

कविचित्र यहाँ से साभार सभ्यता के गलियारे में रखे हुए टायर --चेल्सिया, मैसाच्युसेट्स "जी हुज़ूर, चूहे हैं" मालिक-मकान ने जज से कहा, "पर मैं किरायेदारों को बिल्ली पालने देता हूँ. इसके अलावा, गलियारे में यह अपने टायर रखता है." किरायेदार ने अटपटी अंग्रेजी
 
भारत भूषण तिवारी
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तुम्हारा नाम रेचल कोरी है - फ़ातिमा नावूत की एक कविता

भारतभूषण तिवारी द्वारा लगायी पिछली पोस्ट की एक कविता "दास्ताने -रेचल कोरी" के क्रम में प्रस्तुत एक और महत्त्वपूर्ण कविता...... अनुवाद एवं प्रस्तुति सिद्धेश्वर सिंह रेचल कोरी : तेइस बरस की एक ऐसी अमरीकी लड़की जिसे लगभग एक आम आम लड़की का - सा ही जीवन जीन
 
शिरीष कुमार मौर्य
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मेरिलिन ज़ुकरमन की कुछ और कविताएँ

चौरासीवां जन्मदिन चीज़ें बेहतर हो जायेंगी इस उम्मीद में बिताये गए इन सब बरसों के बाद ख़ुशी मनाने का कोई कारण नहीं है इसलिए यह कविता है गोलियों से भून दिए गए हर बच्चे के लिए जो उड़ा दिए गए अपने गांवों के रास्तों पर चलते हुए मेक्सिको में सूडान में कांग
 
भारत भूषण तिवारी
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ईरान से पर्तोव नूरीला की कविता - चयन, अनुवाद तथा प्रस्तुति : यादवेन्द्र

पर्तोव नूरी़ला इरान की प्रखर कवियित्री हैं। १९४६ में तेहरान में जनमी, वहीँ पलीं बढीं और पढीं। बाद में तेहरान यूनिवर्सिटी में पढ़ाने लगीं। १९७२ में पहला काव्य संकलन छपा, पर तत्कालीन शाह शासन ने उसपर प्रतिबन्ध लगा दिया। १९७९ में इस्लामी क्रांति के समय उ
 
शिरीष कुमार मौर्य
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निज़ार क़ब्बानी की कविता - चयन, अनुवाद तथा प्रस्तुति : सिद्धेश्वर सिंह

इस अनुवाद और प्रस्तुति के लिए अनुनाद सिद्धेश्वर सिंह यानी जवाहिर चा का आभारी है। निज़ार क़ब्बानी (1923-1998) की गणना न केवल सीरिया और अरब जगत के उन महत्वपूर्ण कवियों में होती है जिन्होंने न केवल कविता के परम्परागत ढाँचे को तोड़ा है और उसे एक नया मुहावरा
 
शिरीष कुमार मौर्य
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कुफ़्र-मार्टिन एस्पादा की एक कविता

बक ही दिया जाए कुफ़्र: कविता हमें बचा सकती है, उस तरह नहीं जैसे कोई मछुआरा डूबते हुए तैराक को खींच लेता है अपनी कश्ती में, उस तरह नहीं जैसे ईसा ने, चीखों-चिल्लाहटों के बीच, पहाड़ी पर अपनी बगल में सलीब पर लटकाए गए चोर से अमरत्व का वायदा किया था, फिर भी
 
भारत भूषण तिवारी
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पाब्लो नेरुदा की दो अद्भुत कविताएँ - अनुवाद : मंगलेश डबराल

तस्वीर यहाँ से साभार सीधी-सी बात शक्ति होती है मौन ( पेड़ कहते हैं मुझसे ) और गहराई भी ( कहती हैं जड़ें ) और पवित्रता भी ( कहता है अन्न ) पेड़ ने कभी नहीं कहा : 'मैं सबसे ऊँचा हूँ !' जड़ ने कभी नहीं कहा : 'मैं बेहद गहराई से आयी हूँ !' और रोटी कभी नहीं
 
पंकज चतुर्वेदी
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बाग़ीचे के सिपाही - मार्टिन एस्पादा की एक कविता

आज पाब्लो नेरुदा का जन्म-दिन है. मैं इसे कभी नहीं भूलता क्योंकि इसी दिन मेरी पत्नी का भी जन्म-दिन होता है. आज नेरुदा को याद करते हुए प्रस्तुत है मार्टिन एस्पादा की यह कविता. बाग़ीचे के सिपाही इएला नेग्रा, चीले , सितम्बर 1973 तख़्ता -पलट के बाद, नेरुद
 
भारत भूषण तिवारी
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हिब्रू कवि येहूदा आमीखाई की लम्बी कविता - यरूशलम से समुद्र तक और वापसी

मेरा किया हुआ यह अनुवाद अशोक पांडे और उससे दोस्ती के उन विरल दिनों के लिए, जब उसने मुझे येहूदा आमीखाई जैसे कवि से परिचित कराया और उसे अनुवाद करने के लिए उकसाया। आज उन दिनों का संस्मरण बाक़ी है। आमीखाई की इन कविताओं के बीहड़ में भटकना मुझे आज भी बहुत अच
 
शिरीष कुमार मौर्य
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ईरानी कवि अहमद शामलू

ईरान में दमनकारी धार्मिक कट्टरवादियों के खिलाफ़ आंदोलित जनसमूह) ईरान में उभरे जनआक्रोश और इसका दमन करने के तानाशाही रवैये को ध्यान में रखते हुए यहां प्रसिद्ध ईरानी कवि अहमद शामलू (12 दिसंबर 1925-24 जून 2000) की लोकप्रिय कविता का अनुवाद प्रस्तुत है। श
 
यादवेंद्र
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बेर्टोल्ट ब्रेख्त की एक अद्भत प्रेम कविता

आज तक मैंने जितनी भी प्रेम-सम्बन्धी कविताएँ पढ़ी हैं-------और ज़ाहिर है कि मेरे पढने की बड़ी सीमा है, फिर भी-----उनमें जर्मन कवि बेर्टोल्ट ब्रेख्त की यह कविता मुझे महानतम लगी है. इसलिए आप सभी के साथ अपने इस निहायत निजी एहसास या कहिये कि जुनून को साझा औ
 
pankaj chaturvedi
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मारिओ बेनेदेती की कविताएं - पहली किस्त

अंग्रेज़ी साहित्यिक दुनिया में भले ही मारिओ बेनेदेती को उतना न जाना जाता हो पर लैटिन अमरीका के साहित्यिक जगत में उन्हें सदी के खूब बड़े क़द के कहानीकार, कवि, पत्रकार और राजनीतिक रूप में बेहद मुखर बुद्धिजीवी के तौर पर जाना जाता है। 1973 से 1985 के बीच ज
 
यादवेंद्र
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फिलीस्तीनी-अमरीकी कवि सुहीर हम्माद की कविता - दूसरी किस्त / चयन,अनुवाद तथा प्रस्तुति : यादवेंद्र

हादसे के बाद पहले शब्द (11 सितम्बर 2001 के वल्र्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के तत्काल बाद लिखी लम्बी कविता के चुनिन्दा अंश) कोई शब्द नहीं मैंने नहीं लिखा एक भी शब्द कैनाल स्ट्रीट के दक्षिण की राख में नहीं है कोई कविता मलबा और डी0एन0ए0 ढोते रेफि्रजरेटेड
 
शिरीष कुमार मौर्य
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आतंकवादी देखता है

किसी तेज़ फ़िल्म की तरह चलती है यह डरा देने वाली कविता. शिम्बोर्स्का की यह कविता दुनिया भर में अपने कथ्य की वजह से बहुत बहुत मशहूर हुई. आतंकवादी देखता है तेरह बीस पर बम फटेगा शराबख़ाने के भीतर अभी बजा है बस तेरह सोलह. अभी समय है कुछ लोग भीतर जा सकते हैं
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शुन्तारो तानीकावा की कविताएँ - अनुवाद : अशोक पांडे

बारिश, गिरो ना ! गिरो ना बारिश उन बिना प्यार की गई स्त्री पर गिरो ना बारिश अनबहे आंसुओं के बदले गिरो ना बारिश गुपचुप गिरो ना बारिश दरके हुए खेतों पर गिरो ना बारिश सूखे कुंओं पर गिरो ना बारिश जल्दी गिरो ना बारिश नापाम की लपटों पर गिरो ना बारिश जलते गा
 
शिरीष कुमार मौर्य
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एंडी गार्सीया की आवाज़ में नेरूदा की 'सैडेस्‍ट पोएम'

पाब्‍लो नेरूदा की 'सैडेस्‍ट पोएम' के बारे में पहले भी कई बार लिखा जा चुका है. जो कविता के क़रीब रहते हैं, उन्‍हें पता है कि यह कितनी लोकप्रिय रही है. कबाड़ख़ाना में कुछ समय पहले अशोक पांडे ने इस कविता का हिंदी अनुवाद और होसे हुआन तोर्रेस की आवाज़ में
 
Geet Chaturvedi