स्त्रियों की खिलखिलाहटें - लाइज़ेल म्यूलर / अनुवाद तथा प्रस्तुति : यादवेन्द्र
स्त्रियों की खिलखिलाहटेंधू धू कर जला देती हैं अन्याय के महल चौबारेऔर झूठी मनगढ़ंत कहानियाँइनमे तप कर सुन्दर सफ़ेद दीप्ति से निखर जाती हैं...ये संसदीय गलियारों को थर्रा देती हैंखिडकियों को धक्के मार मार करखोल डालती हैं पूरा प्रशस्तजिस से धज्जियाँ बन बन कर
May 18 2010 05:59 PM



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